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बेदाग छूटा भज्जी

भले ही भारतीय क्रिकेट टीम का खिलाड़ी हरभजन सिंह नस्ली टिप्पणी के आरोप से मुक्त हो गया है, लेकिन आस्ट्रेलिया दौरे के दौरान जो कुछ हुआ उसकी गूंज लम्बे समय तक सुनाई पड़ेगी। भारतीय संस्कृति और परम्परा को जानने वाला कोई व्यक्ित इस बात पर विश्वास नहीं कर सकता कि हरभजन के मन में सायमंड्स के प्रति नस्ली दुर्भावना रही होगी। अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कौंसिल (आईसीसी) के अपील आयुक्त ने हरभजन को निदर्ोष करार दे दिया है तो क्या गलत फैसला सुनाने वाले मैच रेफरी माइक प्रोक्टर के विरु कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? हरभजन पर मिथ्या आरोप लगाने वाले आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को भी यूं ही नहीं बख्शा जा सकता। इस विवाद से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बिरादरी के दो फाड़ हो जाने का खतरा उत्पन्न हो गया था। आस्ट्रेलिया और भारतीय टीमों और खेलप्रेमियों के बीच भी खटास पैदा हो गई है। हरभजन के दोषमुक्त होने मात्र से इस नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती। आईसीसी को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे भविष्य में कोई टीम या खिलाड़ी नस्ली टिप्पणी जैसा गंभीर आरोप यूं ही लगाने का साहस न जुटा सके। कड़वा सच यह भी है कि मामले में हमारी जीत भले हुई हो, खिलाडियों द्वारा माँ-बहन की गाली को इतना क्षम्य भी नहीं माना जाना चाहिए। आस्ट्रेलिया के कुछ खिलाड़ी और मीडिया यह दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं कि अपनी आर्थिक शक्ित के कारण बीसीसीआई ने आईसीसी को बंधक बना लिया और क्रिकेट आस्ट्रेलिया को समझौते के लिए मजबूर कर दिया। भारतीय बोर्ड की गलत रणनीति के कारण ही ऐसी छवि बनी है। यदि बोर्ड को हरभजन के निदर्ोष होने व मैच रैफरी के एकतरफा फैसले के उलट जाने का भरोसा था तब उसे दौरा बीच में छोड़कर लौट आने की धमकी नहीं देनी चाहिए थी। बोर्ड को अपना ध्यान क्रिकेट कूटनीति और इस मामले के कानूनी पहलू पर लगाना चाहिए था। उसके पदाधिकारियों के बचकाने बयानों के चलते फैसला संदेह के बादलों के बीच घिर गया है। भज्जी निदर्ोष छूट गया, इसका जश्न तब तक नहीं मनाना चाहिए, जब तक कम से कम उसकी माँ को यह इलहाम न हो कि उसके बेटे ने स्वीकारा है कि उसने माँ की कौम को गाली दी थी। ध्यान रहे भज्जी के लाखों नन्हें प्रशंसक अपने रोल मॉडल का आचरण आत्मसात कर रहे हैं।

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  • Web Title: बेदाग छूटा भज्जी