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अंगदान अब होगा आसान

गुड़गांव में किडनी के गोरखधंधे के बेनकाब होने से जागी सरकार ने उन लोगों को प्रोत्साहित करने का फैसला किया है जो अपने ऐसे प्रियजनों के अंगों को दान देने के लिए आगे आएंगे जिन्हें ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया गया हो। प्रोत्साहन में मृतक की पत्नी, बच्चे या अभिवावकों का जीवन व स्वास्थ्य बीमा कराना, रेल यात्रा में छूट देना और अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में तरजीह देना शामिल है। देश में गुड़गांव जैसे किडनी रैकेट के फलने-फूलने की मुख्य वजह यह है कि हर साल तकरीबन डेढ़ लाख लोगों को प्रत्यारोपण के लिए किडनी की जरूरत होती है, लेकिन केवल साढ़े तीन हजार को ही अंग दानदाता मिल पाते हैं। स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदास ने कहा, ‘स्वैच्छिक अंग दानदाताआें को प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को आसानी से जरूरी अंग मिल सके। इस बात को ध्यान में रखकर सरकार जल्द ही प्रोत्साहन योजना को अमलीजामा पहनाएगी।’ मानव अंगों की कालाबाजारी को रोकने के लिए मौजूदा मानव अंग प्रत्यारोपण कानून में केवल पंजीकृत अस्पतालों में ही प्रत्यारोपण की अनुमति है। साथ ही यह प्रावधान भी है कि किसी मरीज को केवल उसके माता-पिता, भाई-बहन, जीवनसाथी या बच्चों द्वारा ही अंग दान किया जा सकता है। अगर किसी शव या किसी अन्य परोपकारी व्यक्ित से अंगदान लिया जाता है तो हरेक मामले की जांच सरकार द्वारा अधिकृत प्रत्यारोपण केन्द्र में यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती है कि ऐसा दबाव या पैसे के लालच में तो नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय एम्स में चल रहे ऑरगन रिट्रिवल एंड बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन जैसे केन्द्र को देश के सभी महानगरों में खोलने की भी योजना बना रहा है। इस साल कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में ऐसे केन्द्र खोले जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी प्रस्ताव किया है कि सभी सरकारी अस्पतालों में चौबीसों घंटे पोस्टमार्टम किए जाएं ताकि ब्रेन डेड मरीजों से जल्द से जल्द स्वस्थ अंगों को निकाला जा सके। डॉ. उपेंद्र पुलिस रिमांड पर : उधर, किडनी तस्करी मामले मंे अदालती आदेश पर डा. उपेंद्र को रिमांड पर लेने के बाद मुरादाबाद पुलिस ने अन्य आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। सुरागरशी के केंद्र दिल्ली व उससे जुड़े एनसीआर में माने जा रहे हैं। किडनी प्रत्यारोपण मामले में मुरादाबाद पुलिस अदालत से कस्टडी रिमांड ले चुकी है। पुलिस ने डा. उपेंद्र को पांच दिन की रिमांड पर लिया और तफ्तीश शुरू कर दी। पुलिस ने माना, कि उपेंद्र ने पूछताछ में अहम जानकारी दी है, लेकिन जांच में बाधा न पड़े इसलिए अभी उसका खुलासा नहीं किया जा सकता। इस काले कारोबार की कमाई से डा. उपेन्द्र ने बल्लभगढ़ की प्रॉपर्टी के अलावा फरीदाबाद, जयपुर, ग्वालियर, अलवर सहित 35 जगहों पर प्लाट्स खरीदे। विभिन्न बैंक की शाखाआें में उसके 122 खाते हैं। आयकर विभाग ने सभी खाते फ्रीज करने के लिए बैंकों को निर्देश जारी कर दिए हैं । आने वाले दिनों में प्रापर्टियों के अटैचमेंट की कार्रवाई की जा सकती है। बल्लभगढ़ मेर्ं छापेमारी में आयकर विभाग को प्रॉपर्टी और बैंकों से संबंधित दस्तावेज मिले थे। आकलन के मुताबिक प्रॉपर्टी और बैकों में जमा राशि करीब 60 करोड़ की है।

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