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‘सैक्रिफाइस व दुनिया रोज बदलती है’ का मंचन

टीवी व सिनेमा के इस आक्रामक दौर में थिएटर सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को पुख्ता तरीके से उठा दर्शकों की भीड़ को नाटय़ प्रेक्षागृहों की ओर खींचन की भरसक कोशिश मंे लगा है। संगीत नाटक अकादमी ,दिल्ली द्वारा बिहार आर्ट थिएटर व प्रांगण के सहयोग से आयोजित छह दिवसीय नाटय़ोत्सव में दूसरे दिन मंगलवार को ऐसे ही दो नाटकों का मंचन किया गया। एक थी हिन्दी नाटक ‘दुनिया रोज बदलती है’ व दूसरी अंग्रेजी-बांग्ला मिश्रित ‘सैक्रिफाइस।’ड्ढr ड्ढr इन नाटकों को देखने आयी लोगों की भीड़ शुभसंकेत कहा जा सकता है। राजधानी के सुधी नाटकप्रेमी नाटय़ोत्सव के बहाने इनदिनों स्तरीय नाटकों को देखने का सुख पा रहे हैं। कालिदास रंगालय के शकुंतला प्रेक्षागृह में मंगलवार की सुबह करीब 11 बजे हिरावल,पटना द्वारा संतोष कुमार झा के निर्देशन मंे ‘दुनिया रोज बदलती है’ का मंचन किया गया। इस छंदबद्ध नाटक की अबतक देशभर में दो दर्जन से अधिक प्रस्तुतियां हो चुकी हैं। लोकमंच के ढर्रे पर मंचित इस नाटक में दिखाया गया है कि एक वृद्ध राजा के दो बेटे हैं जो बारी-बारी से शासन करते हैं। उन्हें इसमें गुरुजी का पूरा सहयोग व मार्गदर्शन भी मिलता है। इस पूरी प्रक्रिया पर विदूषक की पैनी नजर रहती है। वह इसके भीतर की सच्चाइयों को प्रजा से अवगत कराता रहता है। नाटक में विदूषक की भूमिका में सुमन कुमार, राजा-राजन कुमार, हस्तानन-कुमार परवेज, कमलानन-अभिनव, गुरु-रामकुमार ने दमदार भूमिका निभायी।ड्ढr ड्ढr नाटक में संगीत परिकल्पना व लेखन भी संतोष झा का था। शाम 6 बजे दूसरी प्रस्तुति कोलकाता की नाटय़ संस्था आईएफटीए की ‘सैक्रिफाइस’ की थी। देवाशीष दत्ता के निर्देशन में मैनाक बनर्जी, शिमिता कुंडू, अरिमिता राय, मेधा घोष, प्रसेनजीत भट्टाचार्य, सौरभ चक्रवर्ती, संयुक्ता घोष, स्वराज घोष,कार्तिक बेरा की प्रमुख भूमिका थी। कवि गुरु रविन्द्रनाथ टैगोर की ‘विसर्जन’ पर आधारित इस नाटक में हिंसा व मानवता के बीच चल रहे संघर्ष को दिखाया गया है। विभिन्न स्तरों पर विशाल सेट स्पष्ट व सामाजिक भेदभाव की ओर संकेत करते हैं व संघर्ष के चरमपोत्कर्ष की ओर ध्यान खींचते हैं। आकर्षक परिधान व जीवंत संगीत एक नई छटा बिखेरते हैं। यह नाटक में त्रिपुरा के एक राजा द्वारा देवी को दी जाने वाली बलि पर प्रतिबंध लगा दिए जाने के बाद उत्पन्न परिस्थितियों को रेखांकित किया गया है। इस मौके पर प्रसिद्ध रंगकर्मी सतीश आनन्द, निरंजन गोस्वामी, सुबोध पटनायक,शशिधर आचार्य व डा.ओपी भारती भी उपस्थित रहे। पहले सत्र में आशीष कुमार मिश्र व दूसरे सत्र में शोमा सिन्हा ने मंच संचालन किया।

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  • Web Title: ‘सैक्रिफाइस व दुनिया रोज बदलती है’ का मंचन