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त्रेता का शाप कलयुग में हो गया वरदान

बात त्रेता युग की है। धार्मिक कथा के अनुसार भगवान राम अपनी पत्नी सीता के साथ गया में पिण्डदान करने आए थे। उसी दौरान फल्गु नदी के एक झूठे बयान से कुपित हो देवी सीता ने उसे शाप देकर बिना पानी की नदी बना दिया था। तब से शापित फल्गु रेत का दरिया बनकर रह गई, लेकिन त्रेता का शाप कलयुग में वरदान हो गया। जल विहीन फल्गु नदी का कोई महत्व नहीं रह गया था। लेकिन अब उसी फल्गु के रेत के लिए करोड़ों की बोली लग रही है। प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक बालू यहां से बाहर भेजे जा रहे हैं।ड्ढr ड्ढr गया जिले के बोधगया से जहानाबाद के आेकरी तक फल्गु नदी से जमकर बालू का खनन हो रहा है। राज्य सरकार के खनन विभाग ने इन दोनों जिलों में फल्गु के बालू उत्खनन की बंदोबस्ती कई पैकेजों में की है। चालू वित्तीय वर्ष में कोई भी पैकेज एक करोड़ से कम में बंदोबस्त नहीं हुआ है। फल्गु के बालू से चालू वित्तीय वर्ष में जहानाबाद जिले में खनन विभाग को एक करोड़ से अधिक राजस्व की प्राप्ति हुई है। इधर फल्गु के बालू की लगातार बढ़ रही मांग के कारण आगामी वित्तीय वर्ष में और अधिक राजस्व वसूली की उम्मीद है। जिले के घोसी प्रखंड के शर्मा, सुकियामा व बंधुगंज घाटों से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टरों पर बालू लादे जाते हैं। ये बालू फिर ट्रकों पर लोड होते हैं और बाहर भेजे जाते हैं। फल्गु के बालू की गुणवत्ता काफी अच्छी है। इस कारण इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।ड्ढr ड्ढr भवन निर्माण में तेजी के कारण दिन प्रति दिन बालू अनमोल होता जा रहा है। फल्गु के बालू की मांग इन दिनों पटना ही नहीं मुजफ्फरपुर ,वैशाली ,दरभंगा,मधुबनी सहित उत्तर बिहार के कई जिलों में काफी अधिक है। प्रतिदिन बालू लदे ट्रकों का तांता यहां लगा रहता है। बंदोबस्ती लेने वाले ठेकेदारों को रुपए की वर्षा हो रही है। हालत यह है कि बालू लदे ट्रकों के अत्यधिक चलने से घोसी-जहानाबाद पथ का रख रखाव विभाग के लिए मुश्किल हो गया है। भारी वाहन के लोड यह पथ जर्जर हो चुकी है।

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