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‘डागमारा’ परियोजना को केंद्र की हरी झंडी

बिहार की महती पनबिजली परियोजना ‘डागमारा’ को केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है। एक ओर जहां दर्जनों परियोजनाएं पर्यावरण क्िलयरेंस न मिलने के कारण वर्षो से अटकी पड़ी हैं, वहीं डागमारा पनबिजली परियोजना को पर्यावरण संबंधी मंजूरी मिल जाने से बिहार को भारी राहत मिली है। मंत्रालय के अतिरिक्त निदेशक डॉ. एस. भौमिक ने केन्द्रीय ऊर्जा सचिव व केन्द्रीय विद्युत प्राधिकार के अलावा बिहार के ऊर्जा सचिव, वन एवं पर्यावरण सचिव को स्वीकृति की सूचना दे दी है। डॉ. भौमिक ने बिहार के प्रदूषण नियंत्रण परिषद को भी मंत्रालीय मंजूरी की जानकारी दी है।ड्ढr ड्ढr कोसी प्रक्षेत्र में स्थापित होने वाली 126 मेगावाट की इस परियोजना पर 600 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने हैं। यह बिहार की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना होगी, जिसमें 42-42 मेगावाट की तीन इकाइयों का निर्माण होगा। इस परियोजना की विस्तृत संभाव्यता रिपोर्ट (डीपीआर) के लिए देश की प्रसिद्ध कंपनी ‘वैपकास’ से पहले ही एमओयू हो चुका है। यही नहीं एशियन डेवलपमेंट बैंक भी इस परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद पर अपनी सहमति दे चुका है। ऊर्जा विभाग पहले ही इस परियोजना के लिए सारी प्रारंभिक औपचारिकताएं पूरी कर चुका है। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो तीन वर्षो के अंदर उत्तर बिहार का बड़ा हिस्सा जगमगा उठेगा।बिहार की ही दुर्गावतीड्ढr ड्ढr जलाशय परियोजना पर्यावरण संबंधी समस्याओं के कारण ही अबतक पूरी नहीं हो पाई है और 400 करोड़ रुपए की राशि खर्च होने के बावजूद संबंधित क्षेत्र के किसानों को कोई राहत नहीं मिल पायी है। ऐसे में केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी के बाद इस परियोजना के कार्यान्वयन की राह की सबसे बड़ी परेशानी दूर हो गई है। गौरतलब है कि कोसी बराज के डाउन स्ट्रीम में 22.5 किलोमीटर पर वीरपुर से कटिहार के कुरसेला के बीच 126 मेगावाट पनबिजली की क्षमता का पता चलने के बाद राज्य सरकार ने इसके निर्माण की दिशा में कवायद शुरू कर दी है। यहां बिहार स्टेट हाइड्रोइलेक्िट्रक कारपोरेशन (बीएचपीसी) की 42-42 मेगावाट क्षमता की तीन पनबिजली इकाइयों के निर्माण की योजना है।ं

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