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भूख से तड़पकर वनकर्मी की मौत

बिहार राज्य वन विकास निगम में कार्यरत ट्रैक्टर चालक महेश महतो आखिर भूख से तड़प-तड़पकर मर गया। मूल रूप से शीतल पट्टी, थाना-चिरैया, पूर्वी चंपारण का निवासी महेश वषरे से इस निगम में कार्यरत था। मृत प्राय: हो चुके इस निगम के कर्मचारियों को दो वषरे से वेतन नहीं मिल पाया है। आर्थिक तंगी झेल रहे महेश और उसके परिवार के सामने फाकाकसी की नौबत थी। कई दिनों से कुछ निवाला भर ले रहे महेश की तबियत मंगलवार की शाम अचानक खराब हो गई। देर रात भूखी अतड़िया जवाब दे गईं और उसने दम तोड़ दिया। भूख से अपने सहयोगी की मौत होने की खबर सुनते ही वन निगमकर्मी उत्तेजित हो उठे।ड्ढr ड्ढr बुधवार को दोपहर वनकर्मियों ने उसकी लाश के साथ आर-ब्लॉक चौराहे पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे एक वन निगमकर्मी ने बताया कि मृत हो चुके इस निगम को पुनर्जीवित करने की कोशिश की गई पर सरकारी उदासीनता के कारण यह पुनर्जीवित नहीं हो सका। बताया जाता है कि निगम के परिसमापन संबंधित एक याचिका पटना उच्च न्यायालय में भी दाखिल की गई थी। इस याचिका (042007) पर सुनवाई करते हुए बीते अक्टूबर में हाईकोर्ट ने वन विकास निगम की परिसंपत्तियों एवं दायित्वों को बिहार और झारखंड के बीच विभाजन के लिए शीघ्र ही केन्द्र सरकार से अनुरोध करने और निगम को पुनर्जीवित करने का आदेश दिया था परंतु इस आदेश का सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। प्रभाव पड़ा तो यहां कार्यरत कर्मचारियों पर जिन्हें वषरे से वेतन के लाले पड़े हैं। वेतन के अभाव में आर्थिक तंगी से जूझ रहे निगमकर्मियों के बीच इस बात का खौफ छाया है कि महेश महतो के बाद भूख रूपी दानव अब किसको अपना निशाना बनाता है।ं

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