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22 फरवरी, 2020|3:04|IST

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जांबाज सैनिकों को नहीं मिल रहा उचित सम्मान

चुनाव के दौरान हिंसा में किसी कर्मचारी की मौत पर दस लाख तक का मुआवजा देने वाली राज्य सरकार सिर पर कफन बांधकर देश सेवा के लिए निकले सैनिकों के वीरता पुरस्कार प्राप्त करने पर सम्मान के लिए बहुत उदार नहीं है। इसीलिए मुआवजे और सम्मान की राशि में बड़ा गैप है। बहादुरी का पुरस्कार जीतने वाले सैनिकों को राज्य सरकार की आेर से जो धनराशि दी जाती है उसकी तुलना सेना अधिकारियों के एक माह के वेतन से भी नहीं की जा सकती है। परमवीर चक्र विजेता को राज्य सरकार की आेर से मात्र साढ़े 22 हजार नकद दिया जाता है। सरकार उन्हें एक भूखंड भी देती है लेकिन व्यवहार में ऐसा कम ही होता है और पुरस्कार विजेता सैनिकों को भूखंड के बदले एक लाख पचास हजार रुपये नकद ही भुगतान कर दिया जाता है।ड्ढr ड्ढr अशोक चक्र विजेता सैनिक को नकद 20 हजार रुपये के अलावा जमीन के बदले 125000 रुपये मिलते हैं तो सवर्ोत्तम युद्ध सेवा मेडल प्राप्त सैनिक को 17 हजार रुपये नकद के अलावा जमीन के बदले 110000 रुपये मिलते हैं। इसी तरह महावीर चक्र विजेता सैनिकों को राज्य सरकार की आेर से मात्र 15 हजार रुपये नकद के अलावा भूखंड के बदले 140000 रुपये दिये जाते हैं। वीर चक्र विजेता सैनिक सात हजार रुपये नकद और भूखंड के बदले 50300 रुपये के हकदार होते हैं तो शौर्य चक्र विजेता को पांच हजार नकद के अलावा भूखंड के लिए 40000 रुपये मिलते हैं। कीर्ति चक्र प्राप्त करने वाले सैनिक को राज्य सरकार की आेर से 12000 नकद के अलावा भूखंड के लिए 75000 रुपये मिलते हैं। सैनिक कल्याण निदेशालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 1में सैनिकों के सम्मान के लिए बनाये गये इस ढांचे में अब तक कोई संशोधन नहीं हुआ है। जबकि पुरस्कार लेने के लिए बुलाये गये सैनिकों पर पुरस्कार की राशि से ज्यादा यात्रा और अन्य भत्ते पर खर्च हो जाते हैं।ड्ढr ड्ढr इसके उलट पंजाब की सरकार ने वर्ष 02 में इस ढांचे में संशोधन करते हुए अपने वीर सैनिकों के सम्मान में देने वाली राशि को 25 लाख तक बढ़ा दिया। बता दें कि केन्द्र ने बहादुरी का पुरस्कार जीतने वाले सैनिकों के लिए न्यूनतम धनराशि तय की है। लेकिन राज्य सरकारों को यह छूट है कि वे अपनी सीमा खुद तय कर सकती हैं। सैनिक कल्याण निदेशालय के सूत्र बताते हैं कि आंध्र प्रदेश, असम और दिल्ली जैसे राज्यों में भी कुछ ऐसी ही व्यवस्था है। हालांकि वे अपने पड़ोसी देश की तुलना नहीं कर पाते क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार परमवीर चक्र विजेता अपने सैनिकों को दो लाख रुपये देती है तो महावीर चक्र विजेता को 1.25 लाख और वीर चक्र विजेता को 50 हजार रुपये देती है।

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  • Web Title: जांबाज सैनिकों को नहीं मिल रहा उचित सम्मान