DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

उपेंद्र ने कई लोगों को बनाया ‘मामू’

किडनी रैकेट से जुड़कर अकूत कमाई करने वाले डॉ. उपेंद्र ने शहर में शुरुआती दौर में फाइनेंस कंपनी के जरिए अपने पैर जमाए थे। शहर की बड़ी हस्तियों और अन्य लोगों को कंपनी से जोड़करकरोड़ों रुपये समेटकर 1में वह फरार हो गया था। उपेंद्र ने स्टेट बैंक की बागपत रोड स्थित शाखा को भी चूना लगाया। धोखाधड़ी के मामले में शहर पुलिस को भी डॉ. उपेंद्र की तलाश रही, लेकिन वह हाथ नहीं आया। मुरादाबाद पुलिस ने किडनी रैकेट का खुलासा करते हुए डॉ. उपेंद्र की गिरफ्तारी की जानकारी दी तो एक बार फिर वह शहर की न बड़ी हस्तियों, बल्कि शेयर और फाइनेंस कारोबार में फंसकर शिकार बने लोगों के बीच चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। किडनी रैकेट से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी में डॉ. उपेंद्र का नाम आया तो इस प्रकरण की तार न सिर्फ मेरठ से जुड़े, बल्कि पुलिस की जांच-पड़ताल में सामने आया कि इसकी जड़ें यहां भी गहरी थी।ड्ढr ड्ढr डॉ. उपेंद्र ने एमबीबीएस की डिग्री लेने के साथ ही शहर में आकर अपनी पैठ बनाई। यहां 10-0 के बीच अपनी पहचान बनाने के साथ उसने फाइनेंस कंपनी खोली। यही नहीं, शेयर बाजार का खासा कारोबार भी यहां फैला लिया था। वर्ष 1में शेयर घोटाला (हर्षद मेहता कांड) के बाद डॉ. उपेंद्र भी मेरठ शहर और मवाना से करोड़ों रुपये की संपत्ति बटोरकर फरार हो गया थे। इस दौरान डॉ. उपेंद्र ने शहर कई बड़ी हस्तियों से भी लाखों रुपये समेट लिया था। इस धोखाधड़ी के पीवीएस मॉल मालिक अशोक गोयल भी शिकार हुए। उन्होंने बताया कि 1में उन्होंने लाखों रुपया धोखाधड़ी करने को लेकर डॉ. उपेंद्र के खिलाफ टीपी नगर थाने पर रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया कि उपेन्द्र ने उनकी पत्नी ऊषा गोयल से 30 हजार रुपया उधार लिया था। फरारी के चलते उपेन्द्र पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा था। एक अन्य मामला डॉ. उपेंद्र के खिलाफ अपर जिला जज न्यायालय में चल रहा है। इस मामले में डॉ. उपेंद्र ने बागपत रोड स्थित स्टेट बैंक शाखा से 30 हजार रुपये का टर्म लोन लिया था। इस ऋण में गारंटर बतौर एक स्थानीय चिकित्सक के फर्जी हस्ताक्षर बना लिए थे। चिकित्सक मूल रूप से बागपत जिले का रहने वाला है। चिकित्सक को बैंक ऋण का गारंटर बनने का आभास तब हुआ था जब डॉ. उपेंद्र ने ऋण की अदायगी नहीं की और उसे डिफाल्टर घोषित करते हुए गारंटर की रिकवरी निकाल दी गई। भाइयों ने कहा, जो जैसा करेगा, वैसा भरेगाड्ढr मवाना (ह.सं.)। किडनी रैकेटियर डॉ. उपेंद्र के भाई उसके कृत्य से खासे शर्मिन्दा हैं। उनके बड़े भाई राजेन्द्र का कहना है कि जो जैसा करेगा, वैसा ही भरेगा। उनका कहना है कि पिछले 20-25 वषरे से उनका उपेन्द्र से कोई संपर्क नहीं है। डा. उपेंद्र अपने पांच भाईयों में चौथे नंबर का है। उसके तीसरे नंबर के भाई सतेंद्र की दो माह पूर्व ही मृत्यु हो गयी। डा. उपेंद्र के साथ बीएससी करने वाले दंत के चिकित्सक प्रशांत कुमार दुबलिश ने बताया कि उपेंद्र शुरू से ही तेज तर्रार व शातिर था। एमबीबीएस करने के बाद उसने शेयर्स तथा फाइनेंस का कार्य किया। जिसमें वह काफी लोगों के करोड़ांे रुपये लेकर फरार हो गया था। उसके बाद उसका कोई पता नहीं लगा। उपेन्द्र के बड़े भाई राजेंद्र ने बताया कि लगभग 20-25 वषरे से उनका उनसे कोई संपर्क नहीं है। वह इस बीच कभी भी मवाना नहीं आया, उन्होंने बताया कि हम लोग उसके बच्चों को भी नहीं जानते और न ही बच्चे हमें जानते हैं। उन्होंने कहा, कि दो वर्ष पूर्व जब उपेंद्र ने अपनी लड़की की शादी हमें बुलाया तो हमें पता चला की वह कहां रह रहा है। वहीं उन्होंने बताया कि उपेंद्र की मवाना में कोई प्रॉपर्टी नहीं है और राजेंद्र से 20 वर्ष पूर्व सारी प्रॉपर्टी का बंटवारा कर दिया गया था। ड्ढr एचडीएफसी ने होम लोन पर ब्याज दर घटाईड्ढr मुंबई (प्रेट्र)। एचडीएफसी ने होम लोन ब्याज दर में 0.25 फीसदी की कटौती करने का ऐलान किया है। दूसरे बैंक भी कर सकते हैं एचडीएफसी की राह का अनुसरण। फ्लोटिंग रेट के उपभोक्ताआें को अपने लोन के अनुसार अब देना होगा 10.50 से 11.25 फीसदी के बीच। फिक्स्ड रेट में बदलाव नहीं। घटीं दरें आज से लागू।ड्ढr ड्ढr दाम बढ़ाएगी मारुतिड्ढr नई दिल्ली (वार्ता)। देश की अग्रणी यात्री कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी लिमिटेड अपने सभी मॉडलों के दाम 2000 से लेकर 12000 रुपए तक बढ़ाएगी। कंपनी के आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को यहां इस आशय की जानकारी दी।ड्ढr ड्ढr चार वर्ष की सेवा के बाद 87 विस कर्मियों की सेवा समाप्तड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। बिहार विधानसभा ने चार वर्षो की सेवा के बाद 87 कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी है। ये कर्मी पहली फरवरी से विधानसभा में अपनी सेवा नहीं देंगे। उधर कर्मचारियों ने शुक्रवार को विधानसभा कार्यालय आने का एलान किया है, जिससे कर्मचारियों व विधानसभा के बीच टकराव तय हो गया है। विधानसभा द्वारा हटाये गये कर्मियों में ऐसे सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं, जिन्होंने संसद पर आतंकी हमले के बाद विधानसभा की सुरक्षा के लिए संसद जाकर कमांडो ट्रेनिंग ली थी। यही नहीं कई ने पुस्तकालय संवर्ग के अनुसंधान का उच्च प्रशिक्षण तक लिया है। विधानसभा ने इन सभी कर्मचारियों के शुक्रवार से विधानसभा प्रवेश पर रोक लगा दी है और सभी संवर्ग के प्रधान को इस आदेश का पालन करने की ताकीद भी कर दी गई है। विधानसभा की नजर में वे अब उनके कर्मचारी नहीं हैं। जिन कर्मचारियों की सेवा समाप्त की गई है उनमें सुरक्षा संवर्ग से लेकर पुस्तकालय, ड्राइवर, अनुचर, फराश-मेहतर, अनुसेवक आदि कई संवर्ग के कर्मचारी शामिल हैं। हटाए गए कर्मचारियों में उर्दू पत्रिका के संपादक मंडल के सदस्य भी हैं।हालांकि विधानसभा ने स्पष्ट किया है कि इन 87 कर्मचारियों की सेवा समाप्त नहीं की गई है, बल्कि पूर्व की नियुक्ित शर्तो के तहत 31 जनवरी तक ही इनकी सेवा थी। इन्हें हटाने का कोई आदेश नहीं निकाला गया है। नियमानुसार इनकी सेवा स्वत: समाप्त हो गई है। विधानसभा का यह भी कहना है कि इन कर्मचारियों की सेवा से संबंधित मामला पटना उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उच्च न्यायालय ने इन्हें सेवा में रखने का कोई आदेश नहीं दिया है। ऐसे में 1 फरवरी से इन्हें सेवा में बने रखने का कोई प्रश्न ही नहीं है। विधानसभा ने इनकी सेवा को लेकर गुरुवार को कोई आदेश नहीं निकाला है। विधानसभा का यह भी मानना है कि उनकी सेवा को लेकर पटना उच्च न्यायालय का जो भी आदेश होगा, उसका पालन किया जाएगा।ड्ढr ड्ढr उल्लेखनीय है कि वर्ष 2003 में विधानसभा में इन 87 कर्मचारियों की बहाली हुई थी। इन कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी नियुक्ित विहित प्रक्रिया के तहत विज्ञापन निकाल कर की गई थी, लेकिन एक वर्ष पूर्व उनकी सेवा शर्तो को ‘कान्ट्रैक्ट’ में बदल दिया गया और एक मार्च 2007 को उनका कार्यकाल मनमाने तरीके से 11 माह कर दिया गया। इसके पूर्व विधानसभा ने उनका वेतन भी घटा दिया। इन सबके खिलाफ उनलोगों ने पटना उच्च न्यायालय में अपील की, जहां न्यायालय ने इसकी कार्रवाई पर रोक लगा दी। बावजूद इसके न्यायालय के आदेश की अवमानना करते हुए उन्हें सेवा से हटा दिया गया। विनोद कुमार पाल, रामनरेश अकेला, मो. निशाद, संजय आदि ने बताया कि बहाली के बाद कर्मचारियों को उच्च प्रशिक्षण दिया गया। यहां तक कि आतंकी हमला से निपटने के लिए संसद में कमांडो ट्रेनिंग दी गई। इसके अलावा सुपर ट्रेनिंग मिली। बीएमपी 14 में राजगीर जाकर उन्होंने फायरिंग का प्रशिक्षण लिया। पुस्तकालय संवर्ग में ऐसे लोगों को हटाया गया है जिन्हें रिसर्च का प्रशिक्षण दिया गया। मो. निशाद तो उर्दू पत्रिका के संपादक मंडल के सदस्य हैं।ंं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: एक नजर