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मानवाधिकारों के मामले में भारत-पाक-चीन दागदार

एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने न सिर्फ पाकिस्तान, केन्या और चीन के मानवाधिकार रिकार्ड को चिंताजनक बताया, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में गहरी आस्था रखने वाले देश भारत को भी इस मामले में दागी करार दिया है। वाशिंगटन स्थित संगठन ह्यूमन राइट्स वाच ने वर्ष 2008 के लिए जारी अपनी रिपोर्ट में अमेरिका, यूरोपीय संघ और लोकतांत्रिक आस्था वाले दुनिया के कई देशों पर आरोप लगाया कि वे कई देशों में तानाशाही व्यवस्था के तहत हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन की अनदेखी कर रहे हैं। इन देशों पर ऐसे तानाशाहों की हरकतों की अनदेखी करने का आरोप है जो छद्म लोकतंत्र की आड़ में संवैधानिक और न्यायिक प्रणालियों को धता बताकर कानून का इस्तेमाल अपने पक्ष में कर रहे हैं। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान के सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ द्वारा संवैधानिक छेड़छाड़ के बल पर अपनी जीत सुनिश्चित करने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में भारतीय सुरक्षा बलों, पुलिस, सेना की कार्यशैली को भी दागदार करार दिया गया है। इसमें कहा गया कि भारत में सुरक्षा बल नागरिकों की हत्या, उत्पीड़न आदि के लिए जिम्मेवार है। रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर में कई नागरिकों की हत्या और उत्पीड़न में सुरक्षा बलों की भूमिका की पुष्टि हुई है। पंजाब के बारे में इसमें यह कहा गया कि वहां हुई अनगिनत हत्याआें की जांच की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है।

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