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विस से हटाए गए कर्मियों ने जबरन किया काम

बिहार विधानसभा के हटाए गए 87 कर्मचारियों ने शुक्रवार को जबरन विधानसभा कार्यालय में प्रवेश किया और काम भी किया। हालांकि विधानसभा कार्यालय ने उन्हें हाजिरी नहीं बनाने दी और उनकी उपस्थिति मानने से स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया। विधानसभा की नजर में ये सभी 87 लोग अब उनके कर्मचारी नहीं हैं। गौरतलब है कि विधानसभा ने गुरुवार को 87 कर्मचारियों को 31 जनवरी को 11 महीने का अनुबंध पूरा होने के बाद नौकरी से हटा दिया। इनमें 13 सुरक्षा प्रहरी, 18 अनुसेवक, 12 आदेशवाहक सह अनुसेवक, 6 चालक, 7 पुस्तकालय अनुचर, 22 फराश और मेहतर शामिल हैं। कर्मचारियों ने एलान किया है कि वे विधानसभा के विरोध के बावजूद सरकारी नियमानुसार अपनी सेवानिवृत्ति की उम्र तक कार्यालय आते रहेंगे।ड्ढr ड्ढr ड्ढr उल्लेखनीय है कि वर्ष 2003 में सदानंद सिंह के कार्यकाल में इन 87 कर्मचारियों की नियुक्ित हुई थी। हालांकि महालेखाकार ने पिछले वर्ष अपनी रिपोर्ट में विधानसभा में 400 से अधिक नियुक्ितयों में वित्तीय अनियमितता पकड़ी थी। महालेखाकार की अंकेक्षण रिपोर्ट में उठाई गई आपत्तियों और वित्त व कार्मिक-प्रशासनिक सुधार विभाग की राय के मद्देनजर इन कर्मियों की सेवा 1 मार्च 2007 को 11 माह के लिए अनुबंधित की गयी थी। इस लिहाज से इनका कार्यकाल 31 जनवरी 2008 को पूरा हो गया। विधानसभा ने इन 87 कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के लिए अलग से कोई आदेश नहीं निकाला है, लेकिन संबंधित संवर्गो के प्रधान को इस आशय की मौखिक सूचना दे दी थी कि इन कर्मचारियों की सेवा 1 फरवरी से समाप्त है। ऐसे में शुक्रवार से इन कर्मचारियों विधानसभा आने की कोई जरूरत नहीं है।ड्ढr ड्ढr ड्ढr उधर हटाए गए कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें न्यायालय के स्थगनादेश के बावजूद गलत तरीके से हटाया गया है। इन कर्मचारियों का कहना है कि उनकी नियुक्ित विहित प्रक्रिया के तहत की गई थी। लेकिन वर्ष 2007 के मार्च में मनमाने ढंग से उनकी सेवा शर्तो को ‘कान्ट्रैक्ट’ में बदल दिया गया और अवधि 11 माह कर दी गयी। इसके पूर्व विधानसभा सचिवालय ने उनका वेतन भी घटा दिया। इन सबके खिलाफ उनलोगों ने पटना उच्च न्यायालय में अपील की, जहां न्यायालय ने इसकी कार्रवाई पर रोक लगा दी। बावजूद इसके न्यायालय के आदेश की अवमानना करते हुए उन्हें सेवा से हटा दिया गया। विनोद कुमार पाल, रामनरेश अकेला, मो. निशाद, संजय आदि ने बताया कि बहाली के बाद कर्मचारियों को उच्च प्रशिक्षण दिया गया। यहां तक कि आतंकी हमला से निपटने के लिए संसद में कमांडो ट्रेनिंग तक दी गई। इसके अलावा सुपर ट्रेनिंग भी मिली। बीएमपी 14 में राजगीर जाकर उन्होंने फायरिंग का प्रशिक्षण लिया।ं

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