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जंक्शन बना रेलवे की दुधारू गाय

पटना जंक्शन परिसर रेलवे के लिए दुधारू गाय साबित हो रहा है। जंक्शन परिसर से जहां दो-तीन वर्ष पहले तक महज चार से पांच लाख वार्षिक आय होती थी वह बढ़कर 120 लाख रुपये से अधिक हो गयी है। अगले दो वषरे में यहां की आय 150 लाख तक पहुंचने की संभावना है। रेलवे को राजस्व में वृद्धि सिर्फ थोड़े नियम कानून में तब्दीली लाकर हुई है। इस आय में यात्री व माल भाड़ा से होने वाली आमदनी शामिल नहीं है।ड्ढr ड्ढr ड्ढr जंक्शन परिसर में लगे विज्ञापनों से 52 लाख, छह स्टाल से 18 लाख, दो पाहिया वाहन पड़ाव से 12 लाख, चार पहिया वाहन पड़ाव से 28 लाख व तीन एटीएम से नौ लाख का राजस्व प्रत्येक वर्ष मिल रहा है। इस संबंध में वाणिज्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि 52 लाख सालाना के हिसाब से एक ही कंपनी को जंक्शन परिसर विज्ञापन के लिए दिया गया है। यह कंपनी जिसे चाहेगी विज्ञापन के लिए बोर्ड देगी। इस शुल्क में प्रत्येक वर्ष दस फीसदी की बढ़ोतरी करने का प्रावधान है। पहले जंक्शन परिसर में लगे विज्ञापन बोर्ड से हजार में राजस्व मिलता था। इसी प्रकार पहले स्टॉल मालिक अपनी आय का 20 फीसदी रेलवे को कमीशन देते थे। अब रेलवे कमीशन का सिस्टम हटाकर एक स्टॉल का सालाना ढाई से तीन लाख रुपये एक मुश्त प्रति वर्ष के लिए ले रही है। फिलहाल नये नियम में छह स्टॉल दिये गए हैं। भविष्य में जंक्शन में 20 स्टॉल खोले जाने हैं। पुराने स्टाल को बंद किया जा रहा है। यह नियम बनने के बाद एक स्टॉल मालिक कुछ अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय तक भी पहुंचे। इसी प्रकार दो पहिया व चार पहिया वाहन पड़ाव से सालाना क्रमश: 12 व 28 लाख रुपये की आय हो रही है। जंक्शन पर तीन एटीएम स्थापित किये गये हैं, जिनसे सालाना साढ़े नौ लाख रुपये के लगभग आय हो रही है। भविष्य में 11 एटीएम जंक्शन परिसर में खोले जाने हैं।ड्ढr ड्ढr राजधानी एक्स. का इंजन फेल, खड़ी रही डेढ़ घंटेड्ढr पटना (हिप्र)। पटना-दिल्ली 230राजधानी एक्सप्रेस का इंजन शुक्रवार की रात को फेल हो गया। इस कारण यह ट्रेन रात दस से 11.30 बजे तक आरा-बक्सर के बीच कारीसाथ स्टेशन में खड़ी रही। दानापुर रेल मंडल प्रशासन के द्वारा दूसरे इंजन की व्यवस्था की गयी। इस बीच डेढ़ घंटे का समय लग गया। राजधानी एक्सप्रेस अपने नियत समय से पटना जंक्शन से रवाना हुई थी। कारीसाथ में जैसे ही ट्रेन पहुंची इसका इंजन फेल हो गया। चालक ने इसकी सूचना वहां के स्टेशन मास्टर को दी। इइसके बाद इंजन की वैकल्पिक व्यवस्था की गयी।ं

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