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स्वास्थ्य योजना के तहत 8 हजार बुनकरों का चयन

राज्य सरकार द्वारा बुनकरों के लिए चलायी गयी स्वास्थ्य योजना के तहत आठ हजार बुनकरों का चयन किया गया है। इसके अलावा सरकार ने हस्तकरघा के उन्नयन के लिए 25304 बुनकरों का चयन कर उनके बकाये ऋण के मूलधन को माफ करने का फैसला लिया है। चयनित बुनकरों में अधिसंख्य भागलपुर दंगा के पीड़ित हैं। सरकार ने पावरलूम चलाने वाले बुनकरों को 1.5 रुपया प्रति यूनिट की दर से बिजली शुल्क पर अनुदान भी दिया है।जिन बुनकरों को स्वास्थ्य योजना के लिए चयनित किया गया है उन्हें 15 हजार रुपये तक का इलाज मुफ्त कराने की सुविधा उपलब्ध है।ड्ढr ड्ढr बता दें कि सरकार ने इसके पूर्व चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1167 बुनकरों के बीच उन्नत उपकरणों का वितरण शत-प्रतिशत अनुदान पर किया है। बुनकरों को उनके उत्पादांे की बिक्री के लिए तथा बाजार से सूत लाने ले जाने के लिए साइकिल उपलब्ध कराने की योजना के तहत मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि को बढ़ाकर दो हजार कर दिया गया है। बुनकरों के लिए अलग से संचालित बीमा योजना के तहत भी अबतक बुनकरों का बीमा कराया गया। इसके अलावा महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना के तहत सामाजिक सुरक्षा के अलावा उनके बच्चों को छात्रवृत्ति भी दी जा रही है।ड्ढr ड्ढr 20 तक पूरी हो जाएगी शहरी बीपीएल आबादी की पहचानड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। सूबे की शहरी बीपीएल आबादी की पहचान 20 फरवरी को पूरी हो जाएगी। सभी 124 नगर निकाय प्रबंधन अपने जिलाधिकारियों को बीपीएल की सूची सौंप देंगे। नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी निर्देशों के तहत सभी जिलों के डीएम 24 फरवरी तक यह सूची सरकार को उपलब्ध करा देंगे। नगर विकास विभाग के अधिकारी युद्ध स्तर पर सूची को पूरी करवाने के लिए पूरे प्रदेश के दौरे पर हैं। विभाग ने सभी 124 निकायों के प्रमुखों एवं कार्यपालक अधिकारियों को कहा है कि इस बार सूची निर्माण में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नगर विकास एवं आवास मंत्री अश्निवी कुमार चौबे ने कहा कि इसी महीने में वे शहरी बीपीएल सूची की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि शहरी बीपीएल आबादी को सरकार द्वारा आरंभ की गयीं गरीबी निवारण योजनाओं का पूरा लाभ देने के लिए यह सर्वे कराया गया है। सूबे के 124 शहरी निकायों की आबादी करीब 87 लाख है। इसमें कितने लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन-बसर कर रहे हैं इसकी अद्यतन स्थिति जानने के लिए 07 नगर निगम, 42 नगर परिषद एवं 75 नगर पंचायतों में यह सर्वे कराया गया। सरकार ने अगस्त 2006 में बीपीएल आबादी की फिर से पहचान कराने का निर्णय किया था। दो महीने में सर्वे कर लेना था। पर कई तकनीकी कारणों एवं वर्ष 2007 में नगर निकायों के चुनाव के कारण सर्वे का काम बाधित रहा।ड्ढr ड्ढr चुनाव के बाद सरकार ने नगर निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों एवं कार्यपालक प्रमुखों को बीपीएल आबादी के चयन वास्ते कई कार्यशालाओं का आयोजन किया। पारिवारिक सर्वेक्षण सूची की निर्धारित प्रक्रिया में संशोधन किया गया। सूची को विभाग में भेजने के पहले संबंधित नगर निकाय के नवगठित बोर्ड द्वारा अनुमोदित कराना और बैठक में क्षेत्रीय सांसद और विधायक सहित सभी निर्वाचित वार्ड पार्षदों वार्ड आयुक्तों को आमंत्रित करना अनिवार्य किया गया है।

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