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पोत पर ‘टॉयलेट गैस’ बन आई मौत!

भारतीय नौसेना के 17 हजार टन वजनी दूसरे सबसे बड़े जंगी पोत आईएनएस जलाश्व पर शुक्रवार रात हुई दुर्घटना काफी विचित्र और अनोखी थी। न इसमें आग लगी, न गोला-बारूद फटा, न यह कहीं टकराया और न ही कोई यांत्रिकी गड़बड़ी हुई। फिर भी पांच नौसैनिकों की जान चली गई और दो अधिकारियों समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पाखाने की अत्यंत जहरीली एच2एस गैस के कारण किसी पोत में ऐसा हादसा पहली बार हुआ है। नौसेना सूत्रों के मुताबिक इस पोत पर करीब एक हजार नौसैनिक और अधिकारी रहते हैं। दुर्घटना के समय मानव विसर्जित मलबे की गैस का दबाव इतना अधिक हो गया कि एक गैसपाइप लीक हो गया जो कि शायद मरम्मत के दौरान फट गया और गैस से दम घुटने के कारण पांच नौसैनिकों- के.वी.आर. कृष्णराव, डी.आर.कुमार चैतन्य, रमेश कुमार नायक, नरेन््द्र यादव और दीपक शिवरन की मौत हो गई। हादसे में लेफ्टिनेंट कमांडर श्वेत गुप्ता और रुचिर प्रसाद के अलावा इलेक्िट्रशियन व मैकेनिक भी गंभीर रूप से घायल हो गया। घायलों में गुप्ता को छोड़ बाकी दोनों की हालत स्थिर है। एच2एस गैस इतनी खतरनाक होती है कि नाक में पहुंचते ही मौत हो सकती है। सूत्रों का कहना है दुश्मन से बचाव के लिए जंगी पोतों के मामले में कई एहतियात बरतने पड़ते हैं। यदि मलबे को दिन के उजाले में या जब-तब ‘पंप आउट’ किया जाए तो पानी पर तैर रहे मलबे से दुश्मन को जहाज की स्थिति का पता चल सकता है। इसलिए मलबे को सीवेज प्लांट में परिशोधन के बाद रात के अंधेरे में और निश्चित अवधि के बाद बहाया जाता है। आईएनएस जलाश्व विशाखापत्तनम और पोर्टब्लेयर के बीच चल रहे नौसेना के एक महत्वपूर्ण अभ्यास ‘ट्रोपेक्स‘ में भाग ले रहा था। दुर्घटना के बाद शनिवार की सुबह यह पोर्टब्लेयर पहुंचा। घायलों को वहां अस्पताल में भर्ती कराया गया है और मृतकों के शवों को वायुसेना के विमान से लाने की व्यवस्था की जा रही है। अमेरिकी नौसेना में 1में शामिल किए गए ट्रैन्टन नामक इस पोत को पिछले ही साल भारतीय नौसेना में जलाश्व के नाम से शामिल किया गया था। इस पर 100 वाहन रखे जा सकते हैं और यह जल-थल कमांडो कार्रवाई तथा आपदा राहत कार्य में काफी मददगार साबित होता है।

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