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यूपी के ‘मोस्ट वांटेड’ दिल्ली पुलिस के हत्थे कैसे चढ़ रहे हैं

पहले विधायक कृष्णानंद राय का हत्यारा संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा, उसके बाद कुख्यात बृजेश सिंह और अब इलाहाबाद के ‘भगोड़े’ सांसद अतीक अहमद की गिरफ्तारी। उत्तर प्रदेश के आईजी (क्राइम) भले ही दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच के हाथों होने वाली इन गिरफ्तारियों को यह कहकर मजाक में उड़ा रहे हैं..‘आउटसोर्सिग का जमाना है.हम भी अपने वांटेड अपराधियों को दिल्ली वालों से पकड़ा रहे हैं.’ पर हकीकत यह नहीं। यूपी के गृह विभाग से लेकर वरिष्ठ पुलिस अफसरों तक को दिल्ली पुलिस की ये रक्त विहीन मुठभेडें़ गहरी चिंता में डाले हुए हैं।ड्ढr आखिर यूपी के ‘मोस्ट वांटेड’ दिल्ली पुलिस के हत्थे कैसे चढ़ रहे हैं? यह मुख्यमंत्री मायावती के कड़क तेवरों से कुख्यात अपराधियों के मन मंे पैदा हुए एनकाउंटर का भय है या फिर उत्तर प्रदेश पुलिस की नाकामयाबी कि वह बड़े अपराधियों तक पहुँच ही नहीं पा रही? इस सवाल का जवाब पुलिस के बड़े अफसर अपने-अपने ढंग से दे रहे हैं। डीआईजी स्तर के एक अधिकारी कहते हैं-‘अतीक की अजीबोगरीब गिरफ्तारी पहला मामला नहीं। इससे पहले बृजेश सिंह की गिरफ्तारी हो या फिर संजीव माहेश्वरी की। न कोई गोली चलती है और न कोई भागदौड़.इतने आराम से यह बड़े-बड़े अपराधी पकड़े जाते हैं कि लगता है कि माफिया की गिरफ्तारी से आसान कोई काम नहीं। जीवा के पास तो एक कट्टा मिला और गिरफ्तारी के वक्त वह रेलवे लाइन के किनारे टहल रहा था’ ।ड्ढr एसटीएफ के एक अफसर इसका दूसरा कारण बताते हैं। उन्होंने बताया-‘दिल्ली की स्पेशल सेल को देश की राजधानी में होने का फायदा मिलता है। उनके सूत्र राष्ट्रीय स्तर के होते हैं। वे किसी भी राज्य में दूसरे राज्यों की पुलिस के मुकाबले आसानी से आ-जा सकते हैं। उन्हें इसकी अनुमति भी तुरंत मिल जाती है। ऐसे में यूपी पुलिस के मुकाबले उनके लिए भगोड़ों को पकड़ना ज्यादा आसान होता है।’ पर एक उच्च पदस्थ आईपीएस अफसर का दूसरा ही तर्क है। उनके मुताबिक-‘ ‘दिल्ली स्पेशल सेल क्ष गैंग ऑफ नटोरियस कॉप्स’.यह एक गैंग है जिसमें तीस-चालीस खुराफाती किस्म के छुट्टा सिपाही हैं जो देश भर में घूमा करते हैं.उनसे कोई सवाल-जवाब नहीं होता.यह लोग प्रभावशाली और लाखों-करोड़ों खर्च करने की कूबत रखने वाले अपराधियों के सरेंडर को ऐसा ‘प्लांट’ करते हैं कि वह गिरफ्तारी लगे। यह लोग बड़े राजनीतिकों के लिए भी काम करते हैं।’ हालाँकि महत्वहीन पद पर बैठे एक आईजी का कहना है कि पिछले कुछ समय से बड़े अपराधियों को पकड़ पाने में यूपी पुलिस नाकाम साबित हो रही है।ं

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