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कर्ज-ब्याज के फेर में उलझे व्यक्ित की मौत

बेटे की उच्च शिक्षा के लिए सूदखोर से तीन साल पहले कर्ज लेने के बाद धीरेन्द्र नाथ तिवारी कभी उबर नहीं सके। कर्ज उतारने के लिए फिर उधार लिया। ब्याज की अदायगी को तीसरे से कर्ज माँगा! कर्ज-ब्याज के दबाव में बीमार हो गए। आखिर दो दिन पहले उनकी मौत हो गई। परिवार के सदस्य दहाड़े मार कर रोए कि ‘सूदखोरों के जुल्म ने जान ले ली!’ड्ढr आलमबाग के श्रीनगर मोहल्ले के मकान नम्बर-55ख 1े निवासी डीएन तिवारी की आलमबाग में कॉस्मेटिक की छोटी सी दुकान है। इकलौते बेटे की उच्च शिक्षा के लिए 18 नवम्बर 2005 को उन्होंने मोहल्ले के ही सोनू सरदार से डेढ़ लाख रुपया बतौर कर्ज लिया। इसके लिए सौ रुपए के स्टाम्प पर शपथ पत्र भी दिया। सूद देने का वायदा किया लेकिन समय से कर्ज की अदायगी में नाकाम रहा। सोनू ने सूद समेत रुपया वापस माँगा। नोकझोंक हुई और फिर विवाद कोर्ट पहुँच गया। इस बीच श्री तिवारी ने आलमबाग के एक व्यापारी नेता से सूद पर रुपया लिया। मकान के दस्तावेज उसके यहाँ गिरवी रख दिए। निजी क्षेत्र के एक बैंक से भी कर्ज ले लिया। धमकियाँ मिलने लगीं। मकान डूब जाने का गम सामने था। ब्याज चुकाने और सूद के बढ़ते दबाव में श्री तिवारी को बीमारियों ने जकड़ लिया। दो दिन पहले अचानक उन्हें दौरा पड़ा और श्री तिवारी ने हमेशा के लिए आँखें मूँद लीं। परिवार के सदस्यों ने कहा कि सूदखोरों के दबाव के चलते डीके तिवारी की मौत हुई है। डीके तिवारी की पत्नी सावित्री कहती हैं कि पहले ही पुलिस को धमकियों की जानकारी दी थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सोनू सरदार का कहना है कि पड़ोसी होने के नाते उन्होंने कर्ज दिया था। जिसे वह लौटा नहीं रहे थे। लिहाजा उसने कानूनी कार्रवाई कर रखी है। धमकाने या वसूली के लिए प्रताड़ित करने के आरोप बेबुनियाद हैं।

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