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अंतिम मंगलवारी जुलूस में गूंजे जयकार

राजधानी में मंगलवार की शाम उत्साह और उमंग के साथ अंतिम मंगलवारी जुलूस निकाला गया। विभिन्न अखाड़ों के खिलाड़ियों ने गाजे-बाजे के बीच तलवार, लाठी, भाला और चाकू का प्रदर्शन कर लोगों को अचंभित कर दिया। महावीर चौक पर ढोल-ताशा की धुन पर नाचते-झूमते भक्त आकर्षण का केंद्र रहे। यहां श्रीमहावीर मंडल रांची और श्रीचैती दुर्गा पूजा के पदाधिकारियों ने भक्तों का स्वागत किया। श्रीमहावीर मंडल डोरंडा के पदाधिकारियों के नेतृत्व में रात साढ़े नौ बजे पोखर टोली से जुलूस निकाला गया। श्रीशिवमहावीर मंदिर में देर रात अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन और पूजा-अर्चना कर सभी लौट गये। दो अप्रैल को श्रंगार की रात होगी। विभिन्न समिति द्वारा झांकी प्रतियोगिता होगी। तीन अप्रैल को श्रीराम लला के जन्मोत्सव पर भव्य शोभायात्रा निकाली जायेगी। आज करं सूर्य की आराधनारांची। बुधवार को सूर्य षष्ठी व्रत है। संध्या 6.02 बजे शाम सूर्यास्त होगा। इस बेला में अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य दान देने का उत्तम समय है। वासंतिक नवरात्र में सूर्यवंशीय राजा राम के जन्म के ठीक तीन दिन पूर्व शक्ित की साधना के साथ सूर्य की आराधना का विशेष महत्व है। सूर्य के अघ्र्य काल में सर्वार्थसिद्धि योग भी है। इस योग में संकल्प करने से सभी तरह की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। सूर्य को यदि समयाभाव में जल, दूध का अघ्र्य नहीं दे सकें, तो अस्ताचलगामी सूर्य का दर्शन और नमस्कार जरूर करं।ड्ढr सूर्य साधना : बुधवार को सूर्य साधना का सवरेत्तम मुहूर्त है, जो राज्य, राजनीति, सरकारी सेवा, तेजस्वीता, महत्वकांक्षा, संतान, ख्याति, पराक्रम का लाभ चाहते हैं, वे सूर्य की पूजा करं। सूर्य को दूध, जल, लाल चंदन, लवंग, गुड़, पंचामृत का अघ्र्य दें। तांबे के लोटे में दूध, दही, पांचमृत को न लें।ड्ढr क्या करं : बुधवार को सूर्य षष्ठी व्रत है, आदित्य हृदय, सूर्य चालीसा, सूर्य मंत्र ‘ऊं घृर्णि सूर्याय नम:’ का मंत्र जप करं। लाल रंग का वस्त्र धारण करं। सूर्याघ्य मंत्र-ड्ढr ऊं एहो सूर्य सहस्त्राणि तेजो राशि जगत्पते।ड्ढr अनुकंपा महाभक्तया सूर्यार्ध्य दिवाकर॥ड्ढr पं. रामदेव पांडेयं

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