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बेगूसराय में माकपा नेतृत्व को झेलना पड़ा आक्रोश

माकपा के राज्य सम्मेलन में राज्य नेतृत्व को प्रतिनिधियों का आक्रोश झेलना पड़ रहा है। वहीं नेतृत्व ने भी अपने प्रतिवेदन में आत्मालोचन करते हुए स्वीकार किया है कि राज्य कमिटी और राज्य सचिव मंडल के सदस्यों को अपने नेतृत्वकारी व राजनैतिक भूमिका अदा करने की जरूरत है। अधिकांश सदस्य अपने जिले तथा मोर्चे से संबंधित रिपोर्ट तक ही सीमित रहते हैं। प्रमुख राजनैतिक सवालों और अपने जिले या मोर्चे से संबंधित महत्वपूर्ण राजनैतिक-सांगठनिक विश्लेषण की गहराई में वे जा नहीं पाते। बिहार जैसे कमजोर राज्य में सिर्फ राजनैतिक अभियानों के जरिए पार्टी का विस्तार संभव नहीं है।ड्ढr ड्ढr राजनैतिकअभियानों को भी रुटीन तरीके से पूरा किया जाता है और पार्टी की पूरी ताकत नहीं लगाई जाती है। नेतागण ऐसे संघषरे में अपनी शारीरिक भागीदारी कर आम लोगों के विश्वास और स्वीकार्यता के महत्व को नहीं समझते। नेताआें और कार्यकर्ताआें की वर्तमान शैली की समीक्षा कर आवश्यक सुधार और दुरुस्तीकरण की जरूरत है। स्थानीय और प्रतिदिन के मुद्दों पर गतिविधियों और संघर्ष को लम्बे समय तक चलाने की जरूरत है ताकि जन संगठनों का निर्माण किया जा सके। प्रतिवेदन में स्वीकार किया गया है कि पिछले वषरे की तुलना में राज्यस्तर पर पार्टी सदस्यता घटी है। राज्य में 2004 में सदस्यों की संख्या 17361, 2005 में 18781, 2006 में 17455 तथा 2007 में 18632 है। 14 जिले में पार्टी सदस्यों की संख्या बढ़ी है जबकि कुछ जिले में कमी या ठहराव आए हैं।ड्ढr ड्ढr माकपा के राज्य सचिव विजय कान्त ठाकुर द्वारा पेश राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया है 18वें राज्य सम्मेलन में अधिकांश प्रतिनिधियों ने बिहार में राजद-कांग्रेस सरकार और खासकर लालू प्रसाद यादव से अलग पहचान रखने पर जोर दिया था। प्रस्ताव में जोर दिया गया है कि भाकपा के साथ संयुक्त संघर्ष विकसित कर वैकल्पिक राजनीति की नींव डाली जा सकती है। भाकपा (माले) का सीपीआईएम के साथ शत्रुतापूर्ण व्यवहार रहा है। इसे अवसरवादी पार्टी करार देते हुए कहा गया है कि उसकी शक्ित में कमी आ रही है। राजद की स्थिति पर प्रतिवेदन में कहा गया है कि 15 वषरे के शासनकाल में जनविरोधी और विकास नहीं करने के दाग आज भी राजद पर लगे हुए हैं। इसलिए गरीबों, दलितों, अल्पसंख्यकों और कमजोर वगरे के बीच जनाधार को वापस करना उसके लिए कठिन है। उसका दृष्टिकोण जातिवादी, संकीर्ण और अव्यवहारिक है। सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों ने विभिन्न प्रस्तावों पर बहस की।ं

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