आखिर कहां हैं पचहत्तर लाख के पोस्टल आर्डर - आखिर कहां हैं पचहत्तर लाख के पोस्टल आर्डर DA Image
21 नबम्बर, 2019|3:14|IST

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आखिर कहां हैं पचहत्तर लाख के पोस्टल आर्डर

वर्ष 1मंे दारोगा अभ्यर्थियांे से परीक्षा शुल्क के रूप मंे लिए गए 75 लाख रुपए के पोस्टल आर्डर की खोज और उसका नकदीकरण कराने संबंधी डीजीपी आदेश अब तक बेअसर है। आजतक इन पोस्टल आर्डरों की खोज-खबर नहीं ली गई। 30 जून 2006 को ‘हिन्दुस्तान’ में पोस्टल आर्डरों को बेकार पड़े होने की खबर के बाद डीजीपी ने तत्कालीन आईजी रमेश सिंह को पोस्टल आर्डर मामले की जांच और उसका नकदीकरण कराने के आदेश दिए थे, पर उन्नीस महीने बाद भी पुलिस प्रमुख के आदेश का पालन नहीं हो सका है।ड्ढr ड्ढr हालात यह है कि ये पोस्टल आर्डर गायब हो गए या इन्हें दीमक चाट गया, राज्य के आलाधिकारियों को इसका पता नहीं है। अधिकारियों की अदूरदर्शिता से सरकार को जहां एक करोड़ पांच लाख रुपए की चपत लगी है वहीं पुलिस सहायता कोष से पूर्व मंे ऋृण के रूप मंे दूसरे कायर्ो के लिए निकाले गए 50 लाख 48 हजार रुपए भी अबतक जमा नहीं हो सके। इस संबंध मंे पूछे जाने पर आईजी(प्रशासन) रवीन्द्र कुमार ने सीधे तौर पर पोस्टल आर्डर की जानकारी से इनकार किया। दूसरी आेर डीजीपी आशीष रंजन सिन्हा को अब इस मामले मंे गड़बड़ी की बू आ रही है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पूर्व में इस मामले को तत्कालीन आईजी रमेश सिंह को देखने को कहा था। बाद में वह रिटायर्ड भी हो गए पर मामला ज्यों का त्यों है। इससे लगता है कि कही न कहीं गड़बड़ी है।ड्ढr ड्ढr गौरतबल है कि 1मंे तत्कालीन आईजी (प्रशासन) बलजीत सिंह के कार्यकाल में 75 लाख के पोस्टल आर्डर मुख्यालय में जमा हुए थे। तब से अबतक अधिकारियों ने इसके नकदीकरण का कोई प्रयास नहीं किया। यहां तक कि इसका नकदीकरण कराकर इस मद से खर्च करने की बजाए 1मंे दारोगा बहाली के वक्त वरीय पुलिस अधिकारियों ने पुलिस सहायता कोष से नियम के विरुद्ध 16 लाख रुपए निकाला, वहीं पूर्व पुलिस महानिदेशक नारायण मिश्रा ने भी अपने कार्यकाल मंे छह माह के अंदर इसी कोष से 34 लाख 48 हजार रुपए निकालने का आदेश दिया, जबकि 75 लाख के पोस्टल आर्डर ज्यों के त्यों पड़े रहे। 1मंे ही इन पोस्टल आर्डरांे का नकदीकरण करा अगर उसे डाकघर या बैंक मंे डाल दिया जाता तो सूद के रूप मंे विभाग को अबतक एक करोड़ पांच लाख रुपए प्राप्त होते। बहरहाल आलाधिकारियों की इस मामले मंे अनभिज्ञता और पुलिस प्रमुख की आशंका से यह जाहिर है कि पोस्टल आर्डर मामले मंे कहीं न कहीं गड़बड़ियां हैं। ये पोस्टल आर्डर साबूत हैं भी या नहीं अब यह जांच का विषय है।

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