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डाक्टरों के लिए सरकार ने बनाई नई नियमावली

तीन वर्षो तक अनुबंध पर गांवों में डाक्टरी और दो बार प्रवेश परीक्षा में पास होने की अनिवार्यता। नीतीश शासन में सरकारी डाक्टर बनने का यही मानक होगा। डाक्टरों की हड़ताल की चेतावनी से जूझ रही राज्य सरकार ने डाक्टरों की बहाली का तरीका ही बदलने का निर्णय किया है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रारूप तैयार कर लिया है। सेवा सम्वर्ग नियमावली के लिए गठित प्राधिकृत समिति ने जो संलेख तैयार किया है उसके मुताबिक सूबे में नियमित नौकरी करने के लिए अब डाक्टरों को तीन वर्ष तक गांवों में अनुबंध पर नौकरी करनी होगी। अनुबंध पर यह नौकरी भी सरकार द्वारा निर्धारित नियमों एवं आरक्षण के अनुपालन के साथ होगी। जिला चिकित्सा संवर्ग के तहत अतिरिक्ित प्राथमिक स्वास्थ्यकेन्द्रों (एपीएचसी) में नौकरी करने के लिए उन्हें प्रवेश परीक्षा में भी उत्तीर्ण होना होगा। एमबीबीएस डिग्रीधारी तीन वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त होंगे।ड्ढr ड्ढr एमएस एमडी समेत उच्चतर शिक्षाप्राप्त डिग्रीधारकों की कार्यावधि एक वर्ष की होगी। अनुबंध पर तीन वर्ष की नौकरी करने के बाद ही वे नियमित बहाली में बैठने के पात्र होंगे। बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के तहत नियमित सरकारी डाक्टर बनने के लिए एमबीबीएस डिग्रीधारियों के लिए तीन वर्षो तक ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में कार्य का अनुभव अनिवार्य बनाया गया है।ड्ढr ड्ढr वहीं एमएस एमडी समेत उच्चतर शिक्षा प्राप्त डिग्रीधारियों को नियमित डाक्टर बनने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में एक वर्ष के कार्य का अनुभव अनिवार्य बनाया गया है। ऐसा अनुभव प्रमाण पत्र होने के बाद ही बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा में वे बैठ सकेंगे। वित्त विभाग में पहुंचे प्रस्ताव के मुताबिक तीन वर्षो के अनुबंध की नौकरी के दौरान वे सिर्फ ‘चिकित्सक’ कहे जाएंगे। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा परीक्षा में पास होने के बाद नियमित नियुक्ित होने पर उन्हें ‘चिकित्सा पदाधिकारी’ कहलाने का सौभाग्य प्राप्त होगा।ं

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