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रात में टेस्ट, बस तीन साल और

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की ख्वाहिश है कि तीन साल में उसकी टीम रात में टेस्ट खेले। इसे संभव बनाने के लिए वह वैज्ञानिकों से सलाह-मशविरा कर रहा है। वैज्ञानिकों की यह मदद खास ऐसी गेंद बनाने को लेकर ली जा रही है जो कि इस परिस्थिति में उपयोग की जा सके। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के जनरल मैनेजर (ऑपरेशंस) माइकल ब्राउन ने मुख्य कार्यकारी जेम्स सदरलैंड से इस प्रोजेक्ट के संबंध में मुलाकात की। उन्होंने बताया, रिचर्स टीम रात के क्रिकेट में मौसम का क्या असर पड़ेगा इस पर शोध कर रही है। इस बात पर भी अध्ययन हो रहा है कि रात के क्रिकेट का आयोजन किस स्टेट में कराया जाना ठीक रहेगा। 10 में फ्लडलाइट में चार दिन का घरेलू क्रिकेट मैच खेला गया था। उस समय खिलाड़ियों ने गेंद के ठीक से नजर न आने की शिकायत की थी। ब्राउन ने कहा, ‘हम दशकों से क्रिकेट गेंद को लेकर बातें कर रहे हैं। रिची बेनॉ हमेशा कहते रहे हैं कि हम चांद पर आदमी को भेज सकते हैं लेकिन ऐसे सफेद गेंद नहीं बना सकते हैं जो 50 ओवर तक चल सके।’ उन्होंने सिडनी मॉर्निग हेरल्ड से कहा, ‘हमें इस समस्या से निपटने के लिए सही अप्रोच अपनानी होगी। हमें इसके लिए सीरियस होना होगा क्योंकि हम देखना चाहते हैं कि क्या वाकई यह संभव है।’ पांच दिन के क्रिकेट में सबसे अहम बात यह है कि जब मैच शुरू होता है तो गेंद हार्ड और नई होती है फिर धीरे-धीरे ढीली पड़ने लगती है। ब्राउन ने कहा कि हल्के रंग की ऐसी गेंद बनाना संभव है जो 80 ओवर तक चल रहे लेकिन यह परम्परागत टेस्ट गेंद जैसी होगी, यह कहना संभव नहीं है। इस बारे में क्रिकेटरों की गेंद न दिखने वाली बात को ध्यान में रखते हुए संगठनों और संस्थानों से इस बारे में वैज्ञानिक अप्रोच अपनाने को कह रहे हैं। इस संबंध में हमने ऑस्ट्रेलियाई खेल संस्थान (एआईएस) से सम्पर्क किया है।ं

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