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महिला नीति ठंडे बस्ते में

राज्य सरकार द्वारा घोषित ‘उत्तर प्रदेश महिला नीति 2006’ ठंडे बस्ते में चली गई है। चालू वित्तीय वर्ष के करीब 10 महीने बीत जाने के बावजूद नई नीति के तहत महिला और बाल कल्याण से संबंधित 14 नई योजनाएँ शुरू नहीं हो सकी हैं। जबकि इन योजनाओं के लिए चालू वर्ष के बजट में करीब साढ़े 18 करोड़ रुपए की धनराशि का प्रावधान किया गया था।ड्ढr सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार के नियोजन विभाग ने विशेषज्ञों के साथ काफी मंथन के बाद ‘उत्तर प्रदेश महिला नीति 2006’ तैयार की थी। इसके तहत ग्यारहवी पंचवर्षीय योजना के पहले साल के बजट में 14 नई योजनाओं को शामिल किया गया था। नई योजनाओं में महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम, श्रमजीवी महिला छात्रावास का निर्माण, महिला संरक्षण और उत्पीड़न निवारण प्रकोष्ठ की स्थापना, उ.प्र. महिला कल्याण निधि की स्थापना, उप मुख्य परवीक्षापरवीक्षा अधिकारी कार्यालयों की स्थापना, जनपदों में किशोर न्याय बोर्ड की स्थापना और बाल कल्याण समितियों का गठन, बालगृह संचालन के लिए स्वैच्छिक संगठनों की स्थापना, किशोर न्याय अधिनियम के अन्तर्गत पश्चातवर्ती देखरेख संगठन की स्थापना, मानसिक रूप से अविकसितविक्षिप्त बालक-बालिकाओं के लिए आश्रय गृह आदि योजनाओं के लिए अलग बजट राशि का प्रावधान किया गया था। लेकिन अभी तक इसमें से कोई योजना शुरू नहीं हो सकी जबकि चालू वित्तीय वर्ष दो महीने बाद समाप्त होने को है। राज्य सरकार द्वारा घोषित ‘महिला नीति’ में कहा गया था कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद में एक महिला सशक्ितकरण केंद्र की स्थापना की जाय, जहाँ एक छत के नीचे महिला हेल्प लाइन, महिला थाना, कानूनी सहायता, कौशल सुधार हेतु प्रशिक्षण केंद्र, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक संस्थाओं की सेवाएँ उपलब्ध रहेंगी और कम्प्यूटराइज्ड सूचना केंद्र, अल्पावास गृह आदि की व्यवस्था रहेगी। सर्वप्रथम यह केंद्र प्रयोग के तौर पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में खोला जाएगा और बाद में आवश्यकतानुसार अन्य जनपदों में विस्तार किया जाएगा। आश्चर्य की बात है कि इस मद में बजट राशि का प्रावधान होने के बावजूद अभी तक इस तरह के केंद्र की स्थापना की दिशा में कुछ भी नहीं हुआ। इस बारे में जब महिला और बाल कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अमल कुमार वर्मा से बातचीत की गई, तो उन्होंने बस इतना कहा कि नई योजनाओं को शुरू करने में समय तो लगता है।

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