DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मांझी के केले ने दिया ख्वाब सजाने का हौसला

‘सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी ख्वाहिश है ये सूरत बदलनी चाहिए।’ बेशक इन्हीं पंक्ितयों को अपनी जिन्दगी का फलसफा बनाकर सारण जिले के मांझी और रिविलगंज प्रखंडों के दर्जन भर किसानों ने समय की रेत पर अपने कर्मों के निशान छोड़ दिए हैं। यहां केले की खेती की गई है जो दो सौ बिगहे से ज्यादा के क्षेत्र में फैली है। मांझी के दुर्गापुर निवासी ओमप्रकाश सिंह को इस क्षेत्र में केले की खेती का पुरोधा कहा जा सकता है जिन्होंने वर्ष 2004 में इसे शुरू कर व्यवसाय व्यवसाय का रूप दिया जो अब तकरीबन 0-100 बिगहा के क्षेत्र में फैल चुका है। ताज्जुब तो यह है कि ये केले पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बैरिया प्रखंड की भूमि पर उगाए जाते हैं। जमीन लीज पर ली गई है। ओमप्रकाश बताते हैं कि बनारस, नागपुर, कानपुर, इलाहाबाद आदि जगहों पर उनके उपजाए केले निर्यात होते हैं। शुरुआत में 12 बिगहे में उन्होंने पूर्णिया से बीज लाकर खेती की शुरुआत की। साढ़े तीन लाख रुपए तब व्यक्ितगत ऋण भी उन्हें लेने पड़े। आमतौर पर वे हरा छाल, रोबस्टा और मालभोग का उत्पादन करते हैं। इस वर्ष से टिसू कल्चर का बीज भी रोपा है।ड्ढr ड्ढr टिसू कल्चर वजन के हिसाब से बेचा जाता है और एक घौंद का वजन करीब 600 किलो होता है। पूर्व मुखिया मनोज सिंह, बनियापुर के हरेन्द्र सिंह तथा भाई देवप्रकाश सिंह और शिवप्रकाश सिंह उनके सहयोगी हैं। ओमप्रकाश ने बताया कि शुरू में पारिवारिक और सामाजिक तौर पर लोगों के व्यंग्य और उलाहना ने विचलित तो किया पर उन्होंने इस कार्य को साधना माना और जुटे रहे। मेनत रंग लाई। आज रोजाना करीब 100 मजदूर उनके केला बागान में रोजगार पाते हैं। पटवन के लिए चार बोरिंग लगाए गए हैं। आमतौर पर केले का सीजन जुलाई से नवंबर तक होता है तब प्रतिदिन दो से तीन हजार तक घौंद प्रतिदिन सप्लाई होता है। रिविलगंज प्रखंड के गरीबा टोला वासी पप्पू सिंह, संतोष सिंह, गुड्डू सिंह तथा उत्तर टोला मांझी के विजय सिंह, अनिल सिंह जैसे किसानों ने भी अब केले की खेती को अपना लिया है। हालांकि खेती में उन्हें नीलगायों से बड़ी परेशानी होती है जो रात के अंधेरे में केले न केवल खा जाती हैं बल्कि पेड़ भी तोड़ देती हैं। केले के बाद उनका झुकाव पपीता और हर्बल की खेती की ओर है। भगवान ने चाहा तो इस क्षेत्र को केला और पपीता के लिए मशहूर कर दूंगा’, कहते हुए उनकी आंखों में बिहार की विकास की किरणें झिलमिलाने लगती हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: मांझी के केले ने दिया ख्वाब सजाने का हौसला