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गया पुलिस की कार्रवाई को कोर्ट ने वैध ठहराया

गया की एक मासूम छात्रा के साथ लातूर (महाराष्ट्र) में बलात्कार करने वाले के खिलाफ गया पुलिस द्वारा एफ .आई.आर. दर्ज कर अनुसंधान किए जाने को पटना हाईकोर्ट ने वैध ठहराया है। न्यायमूर्ति एस.सी. झा की एकल पीठ ने बलात्कार के आरोपी डा. अंजन कुमार द्वारा एफ.आई.आर. और उसके आधार पर किए गए अनुसंधान को रद्द करने के लिए दायर याचिकाको खारिज कर दिया। आरोपी ने अर्जी दायर कर कहा था कि लातूर (महाराष्ट्र) में किए गए अपराध की प्राथमिकी दर्ज करने और उसके आधार पर अनुसंधान करने का अधिकार गया पुलिस को नहीं है। लेकिन अदालत ने इस दलील को ठुकरा दिया। अपने महत्वपूर्ण आदेश में न्यायमूर्ति श्री झा ने घटना की परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति की व्याख्या करते हुए कहा कि याचिकाकत्त्रा ने एक 1वर्षीय मेघावी और होनहार छात्रा के साथ बलात्कार कर उसका जीवन चौपट कर दिया।ड्ढr ड्ढr छात्रा महाराष्ट्र राज्य के अम्बा जोगई, जिला बिड स्थित एम.बी.ई.एस. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में अध्ययन कर रही थी। छात्रा की फुफेरी बहन के पति डा. अंजन कुमार लातूर (महाराष्ट्र) स्थित एक कालेज में व्याख्याता हैं। इसी कारण छात्रा के स्थानीय अभिभावक के रूप में उनका नाम गर्ल्स हॉस्टल के रजिस्टर में दर्ज था जिसमें वह रहती थी। डा. कुमार महीने में एक-दो बार छात्रा से मिलने जाया करते थे। वर्ष 2005 के नवम्बर में अपनी पत्नी की बीमारी की बात कहकर डा. कुमार छात्रा को लातूर अपने घर ले आए। उसे कोल्ड ड्रिंक दिया गया जिसे पीने के बाद वह बेहोश हो गई। जब होश आया तो उसने अपने को नग्न डा. कुमार के बिस्तर पर पाया। उसे पूरी तरह नंगा कर दिया गया था। जब शोर मचाना चाही तो उसे धमकी दी गई कि वह अपना मुंह बंद रखे वरना उसकी नंगी तस्वीर सार्वजनिक कर दी जाएगी। डर के मारे वह खामोश रही। डा. कुमार ने तीन-चार दिनों तक उसे अपने घर में रखा और इस दौरान वह लगातार उससे बलात्कार करता रहा। किसी तरह वह वहां से भागकर गया अपने घर पहुंची और परिवार वालों को घटना के बारे में बताई। इसके बाद उसके बयान पर गया कोतवाली थाने में बलात्कार का मामला कांड संख्या 26205 दर्ज हुआ। एस.एम.एस. के जरिए तथा टेलीफोन से भी लगातार धमकी दिए जाने की पुष्टि भी हुई। अदालत ने कहा कि एक मेघावी छात्रा जिसने 800 में 660 अंक प्राप्त किया हो उसकी जिंदगी को बलात्कारी ने बर्बाद कर दिया। डर के कारण उसने आगे की पढ़ाई को त्याग दिया। अदालत ने गया पुलिस को उस मोबाइल को खोजने का निर्देश दिया जिसके द्वारा छात्रा को धमकी भरा एस.एम.एस भेजा जाता था।

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