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किसान खुद तय करेंगे उत्पाद का भाव

बिचौलिये व दलाल अब किसान की खून-पसीने की कमाई को बेरहमी से लूट नहीं पायेंगे। बाजार में मंदी और तेजी का बहाना बनाकर अब किसानों को ठगना भी उनके लिए आसान नहीं होगा। किसान अब अपने उत्पाद का भाव खुद तय कर सकेंगे, क्योंकि गांव में या उसके आसपास ही उसका अपना बाजार होगा। बाजार में खरीदारों को आकर्षित करने के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।ड्ढr ड्ढr राज्य बागवानी मिशन के तहत ऐसे बाजारों के निर्माण के लिए सरकार निजी एवं सहकारी क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने में जुटी है। बाजार का निर्माण करने को इच्छुक व्यक्ित या संस्था को सरकार अनुदान भी देगी और उनको बागवानी उत्पादों के लिए ग्रामीण बाजार, मंडी या प्रत्यक्ष बाजार के निर्माण की छूट होगी। सरकार के अनुमान के अनुसार इसमें 15 लाख रुपये की लागत आयेगी। हालांकि इससे कम लागत वाले बाजार के निर्माण की योजना भी है जिस पर काम शुरू हो गया है। इस संबंध में कुछ आवेदन भी सरकार को मिल चुके हैं। सामान्य क्षेत्रों में परियोजना कीपूंजीगत लागत का 25 प्रतिशत राशि कैड्रिट लिंक्ड बैंक एंडिड सब्सिडी के रूप में दी जायेगी। यानी सब्सिडी का भुगतान तभी होगा जब लाभार्थी बैंक से लिए गये ऋण का भुगतान समय पर कर देंगे। सरकारी अथवा निजी क्षेत्रों के कोऑपरेटिव , निबंधित सोसाइटी, ट्रस्ट एवं इन्कारपोरेटेड कंपनी के लिए बैंक एंडिड भुगतान की बाध्यता नहीं होगी। शर्त यह होगी कि शेष राशि का वहन वे खुद करेंगे और इसके लिए बैंक की मदद नहीं लेंगे। इन्हीं शर्तों पर सरकार उत्पादों के संग्रहण, ग्रेडिंग के प्रायोगिक बुनियादी ढांचा निर्माण के लिए भी अनुदान देगी। बागवानी मिशन के निदेशक सनद कुमार जयपुरियार बताते हैं कि इस योजना के तहत पूर्व से चल रहे हाटों को भी विकसित करने के लिए मदद दी जायेगी। सरकार की मंशा है कि किसानों को बिचौलियों से मुक्ित मिले और वे अपने उत्पाद का उचित मूल्य पा सकें। बाजार में एक साथ सभी किसान जुटेंगे तो रेट भी वे खुद तय कर सकेंगे और फिर कोई बिचौलिया उन्हें ठग नहीं सकेगा।

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