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लेफ्ट के निशाने पर भाजपा

ांग्रेस से संबंधों को आधार बनाकर चुनाव आयुक्त नवीन चावला को उनके पद से हटाने की मुहिम में जुटी भाजपा के मंसूबों पर वाम दल पानी फेरने की जुगत में है। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने सोमवार को भाजपा पर जवाबी प्रहार करते हुए कहा कि यह भाजपा की फितरत है कि वह अपने गिरेबान में झांकने की बजाए अहम पदों पर बैठे व्यक्ितयों पर कीचड़ उछालने की राजनीति में ज्यादा यकीन रखती है। ‘हिंदुस्तान’ से बातचीत में करात ने साफ कहा कि माकपा चावला को हटाने की भाजपा व एनडीए की मुहिम के पूरी तरह खिलाफ है। भाजपा ने चावला के खिलाफ पिछले दिनों भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त का दरवाजा खटखटाया था। चावला को लेकर सियासी माहौल हाल में काफी गरमा गया, जब भाजपा नेता अरुण जेटली ने मनमोहन सरकार को खुली चुनौती दे डाली कि वह चावला को बचाने के लिए संविधान संशोधन लाकर दिखाए। वैसे माकपा के मन में भी चावला के अतीत को लेकर कोई भ्रम नहीं है, लेकिन चूंकि चावला को हटाने की मुहिम भाजपा दूरगामी राजनीतिक वजहों के लिए कर रही है, इसलिए जाहिर तौर पर माकपा का पहला मकसद भाजपा की मुहिम की हवा निकालना है। यह पूछे जाने पर कि केंद्र सरकार खुलकर चावला के बचाव में आ गई है और एक केंद्रीय मंत्री के हवाले से इस बात की खबरें आई हैं कि सरकार निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्तों के समकक्ष लाने के लिए संविधान संशोधन कर सकती है, इस पर करात ने कहा कि यह मामला एकदम अलग है। संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में बहुमत का होना आवश्यक है। उधर भाकपा की आेर से चावला के मामले पर मिश्रित प्रतिक्रिया आई है। भाकपा महासचिव ए.बी. बर्धन ने कहा कि भाजपा चुनाव आयुक्त चावला को बेवजह निशाना बना रही है। इसमें भाजपा का राजनीतिक एजेंडा छिपा है। लेकिन बर्धन ने चावला का बचाव करने के लिए संविधान में संशोधन के कांग्रेस व यूपीए सरकार के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि हम इस कदम का विरोध करेंगे। बर्धन मानते हैं कि इस तरह की बातें करके कांग्रेस बिना वजह भाजपा को राजनीति करने का मौका दे रही है।

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