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कुरआन की शिक्षाएं वेदांत की तरह ही : सुदर्शन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख के. एस. सुदर्शन ने कहा कि कुरआन की शिक्षाएं वेदान्त जैसी ही है तथा भारत वास्तव में दारुल इस्लाम ही है। ‘इस्लामिक मदरसे बेनकाब’ पुस्तक का विमोचन करते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा इस्लाम शांति और बहुधर्मी समाज में विश्वास रखता है इसलिए भारत को दारुल हर्ब (गैर इस्लामी भूमि) बताना गलत है। भारत वास्तव में दारुल इस्लाम (शांति की भूमि) ही है क्योंकि यहां इस्लाम के 73 फिरके अपने मुताबिक उपासना और जीवनयापन करते हैं। संघ प्रमुख ने मुसलमानों और उनकी संस्थाआें को आतंकवाद से जोड१ने की प्रवृत्ति से बचने की सलाह देते हुए कहा कि भारत के मुसलमानों का बड़ा वर्ग मुख्यधारा से जुड़ा है तथा वह हिन्दुआें के साथ मेलमिलाप से रहना चाहता है। उन्होंने कहा कि अनेक मुसलमानों ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था तथा राष्ट्रनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि मुल्ला मौलवियों और वोट के सौदागरों के कारण ही देश में धार्मिक आधार पर विभाजन की समस्या पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि अतीत में इस्लाम और ईसाइपन ने साम्रायवादी मानसिकता के तहत भारत सहित विभिन्न देशों में तबाही मचाई थी। धर्म का यह साम्रायवादी स्वरूप विश्व मानवता के हित में नहीं है। संघ प्रमुख ने एक इस्लामी विद्वान का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम के धर्म दर्शन से नावाकिफ कुछ लोगों ने मजहब की गलत व्याख्या की जिससे इस्लाम बदनाम हुआ। उन्होंने कहा कि इस्लाम की संकीर्ण व्याख्या के कारण ही धार्मिक कटटरता असहिष्णुता और आतंकवाद का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि भारत में नेताआें द्वारा मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति अपनाने से मुसलमानों का अलगाव और बढ़ा है। मदरसों में दीनी और दुनियावी इन दोनों शिक्षाआें पर समान रूप से जोर देने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि मदरसों में ऐसी आधुनिक शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए जिससे योग्य और सक्षम डाक्टर, इंजीनियर और विशेज्ञय पैदा हों जो विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रनिर्माण में योगदान करें। उन्होंने मदरसों का पाठयक्रम बदलने का सुझाव दिया ताकि मुस्लिम समाज का अलगाव खत्म हो।

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