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अंधता निवारण में एनजीआे का दबदबा

अंधता निवारण कार्यक्रम की लगाम निजी संस्थाआें के हाथ में है। सरकारी डॉक्टरों ने एक वर्ष में करीब 1.40 लाख ऑपरेशन किए तो निजी संस्थाआें ने 3.50 लाख से अधिक। यह बात दीगर है कि बहुत सी संस्थाएँ पैसा हड़पने के लिए ऑपरेशन की संख्या दो या तीन गुना तक बढ़ाकर बताती हैं। कानपुर ऐसी फर्जी संस्थाआें का गढ़ है। इससे सटे क्षेत्रों में एक साल में ही दर्जन भर से अधिक लोग आँखें गँवा चुके हैं।ड्ढr कानपुर की एक नामी संस्था आसपास के दर्जन भर जिलों से मोतियाबिंद के मरीजों को ऑपरेशन के लिए बुलवाती है। पिछले वर्ष स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस पर आपत्ति करते हुए लगाम कसने की कोशिश की लेकिन कभी मंत्री का फोन आया तो कभी एक माफिया का। स्वास्थ्य महानिदेशालय में अंधता निवारण से जुड़े एक संयुक्त निदेशक ने पिछले वर्ष यह बात बड़े अधिकारियों से कही लेकिन ‘आवाज’ दबा दी गई और ‘खेल’ जारी रहा। विभाग में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाली संस्थाआें को प्रति मरीज 750 रुपए मिलते हैं। मरीज लाने-ले जाने और डॉक्टर, नर्स, तकनीकी कर्मचारी, ऑपरेशन-उपकरण, चश्मा, आईआेएल लेंस तथा दवाआें का खर्च निजी संस्थाआें को उठाना पड़ता है। ऐसे में एक मरीज पर 750 रुपए से अधिक का खर्च बैठ सकता है। फिर ऐसी क्या बात है कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन कराने वाली निजी संस्थाआें की भरमार है?ड्ढr

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