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रक्षक ही बन गए भक्षक

जिस रजिस्ट्रार पर विश्वविद्यालय में नियम कानून की देखभाल की जिम्मेदारी होती है, उसीने ऊपर के संवर्ग के अपने वेतन के आधार पर दो लाख रुपए से अधिक का भुगतान ले लिया। यही नहीं सरकार से मिले विकास मद के 3 करोड़ रुपए को पटना विवि टीडीआर के रूप में साल भर जमा रखकर सूद कमाता रहा। यह तो बानगी है। सरकार की तरफ से भेजे गए अंकेक्षकों की टीम ने सूबे के विश्वविद्यालयों में चल रहीं ऐसी कई वित्तीय अनियमितताओं की परत उघाड़नी शुरू कर दी है। मानव संसाधन विकास विभाग की पिछली बैठक में अंकेक्षकों द्वारा गड़बड़ियों के संबंध में पेश की गई रिपोर्ट चौंकाने वाली है। अंकेक्षकों द्वारा सरकार को सौंपे गए ब्योरे के अनुसार पटना विवि के कुलसचिव विभाष कुमार यादव नियम के उलट प्रतिकुल शिक्षक संवर्ग का लाभ (शेष पेज 15 पर)ड्ढr लेते हुए ‘पे प्रोटेम्पशन’ पा रहे हैं। कुलसचिव का वेतनमान 12000 से 16500 है लेकिन परिनियत वेतन निर्धारण समिति ने श्री यादव का 16500+75 रुपए का वेतनमान तय कर दिया। दिसम्बर 2007 तक उन्होंने 2.18 लाख रुपए अधिक वेतन उठा लिया है। इसी विवि के सहायक कुल सचिव मनोज कुमार को बिना सरकार से अनुमोदन लिए ही उप कुलसचिव के पद पर अनियमित प्रोन्नति दे दी गई। वह 17 मई 2000 से रजिस्ट्रार का 6500 से 10500 का वेतन निर्धारण कराकर अधिक राशि उठा रहे हैं। कामर्स कालेज के ॥। ग्रेड के कर्मी डा. एन जमा को पटना विवि में सहायक उप कुलसचिव बनाया गया और पूर्व के सेवा लाभ का संरक्षण देते हुए विवि की अनुमोदन वरीयता एवं वेतन निर्धारण समिति ने 10 मई 02 को उनका मूल वेतन 10 तथा 2004 को 2100 कर तय दिया। अंकेक्षकों ने इस पर अंगुली उठाई है कि डा. जमा को पूर्व सेवावधि का लाभ विवि नहीं दे सकता क्योंकि विवि में उनकी नियुक्ित नई मानी जाएगी और निम्न पद से उच्चतर पद में नियुक्ित होने पर वेतन संरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता। इस लिहाज से डा. जमा से इस लाभ की राशि वसूली जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक विवि ने अतिरिक्त अनुदान की 3 करोड़ रुपए की राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा कर अनियमितता बरती। विकास मद की इस राशि को साल भर तक सूद कमाकर खर्च किया गया। यही नहीं अंकक्षकों ने सरकार से विवि द्वारा बकाया मद में मांगे जा रहे 22.50 लाख रुपए के अतिरिक्त अनुदान को निरस्त करने की अनुशंसा की है। उनका कहना है कि इस राशि के संबंध में विवि प्रशासन द्वारा अंकेक्षक दल को बताया गया कि इस मद में कोई राशि बकाया नहीं है। वहीं विवि से यह पूछा जाना चाहिए कि जब इस राशि की कोई जरूरत नहीं थी तो इसे बजट में शामिल कर मांगा ही क्यों गया।

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