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गिने जाएंगे ‘अवैध’ मत

पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में गत पंचायत चुनाव में मतपत्रों पर स्वास्तिक मुहर के बिना हुए मतदान के बाद अवैध घोषित मतपत्रों की फिर से गिनती करने और उसके आधार पर चुनाव परिणाम घोषित करने का निर्देश राज्य निर्वाचन आयोग को दिया है। राज्य के लगभग हजार पंचायतों का चुनाव परिणाम अदालती आदेश से प्रभावित होगा।ड्ढr ड्ढr न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह की एकल पीठ ने मीरा देवी तथा अन्य की आेर से दायर रिट याचिका को निष्पादित करते हुए सोमवार को यह आदेश दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रजातंत्र में प्रतिनिधियों के भाग्य का फैसला जनता के मतदान से होना चाहिए न कि आयोग के किसी गलत कार्रवाई से। उल्लेखनीय है कि पंचायत चुनाव के दौरान मतपत्रों पर स्वास्तिक चिन्ह के मुहर से मत देना था लेकिन चुनाव आयोग ने जो मुहरभेजा था उनमें बहुत स्थानों पर पाया गया कि मुहर से स्वास्तिक निशान गायब हैं। जब इसकी शिकायत की गई तो मतदाताआें को कहा गया कि केवल लकड़ी की मुहर से ही वे अपना मत डालें। लेकिन जब मतगणना प्रारम्भ हुई तो बिना स्वास्तिक चिन्ह वाले मतपत्रों की गिनती नहीं की गई। बिना स्वास्तिक निशान वाले मतपत्रों को चुनाव आयोग ने भी अवैध ठहराया। आवेदिका की आेर से अधिवक्ता शशिभूषण कुमार मंगलम ने रिट याचिका दायर कर कहा कि स्वास्तिक चिन्ह वाले मुहर से स्वास्तिक का उखड़ जाना आयोग की गलती के कारण हुआ लेकिन उसका खामियाजा उम्मीदवारों को भुगतना पड़ा। जिन उम्मीदवारों को जनता ने अपना मत दिया उसे तकनीकी आधार पर नकार दिया गया। इसके चलते कम मत पाने वाले विजयी हो गए और अधिक मत पाकर भी उम्मीदवार हार गए। अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि मतदाताआें ने मुहर लगाकर अपना निर्णय दिया, जिसे बदला नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि मुहर की आपूर्ति के समय इस बात को देखना चाहिए था कि मुहर में स्वास्तिक का रबड़ लगा है या नहीं। इसमें मतदाताआें का कोई दोष नहीं था। आयोग की आेर से महाधिवक्ता पी.के. शाही ने बहस में भाग लिया।

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