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मेडिक्लेम में आेपीडी सेवाएं भी कवर हों

आगामी बजट मंे डाक्टर वित्त मंत्री से मेडिकल इंश्योरेंस को अनिवार्य किए जाने की मांग कर रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि न केवल इस बजट में मेडिकल इंश्योरेंस को अनिवार्य किया जाए बल्कि इस में ओपीडी सेवाओं को भी कवर किया जाए। मूलचंद अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डा.के.के.अग्रवाल का कहना है कि सारे यूरोप में मेडिकल इंश्योरेंस में ओपीडी को कवर किया जाता है। सिर्फ भारत में अस्पताल में दाखिल होने पर ही मेडिकल क्लेम रोगी को मिलता है जोकि गलत है। टैक्स कंसल्टेन्ट श्री सुभाष लखोटिया का कहना है कि इस मेडिकल इंश्योंरेस के क्लेम की सीमा को 5 लाख से बढ़ा कर 10 लाख किया जाना चाहिए, क्योंकि कोई जरूरी नहीं है कि अस्पताल में दाखिल होने पर 5 लाख रुपये का ही खर्च आए। इस के लिए इंश्योंरेस कंपनी ग्राहक से ज्यादा प्रीमियम वसूल सकती है। डा.के.के.अग्रवाल का कहना था कि सरकार गरीबों के लिए बहुत सारी योजनाएं बनाती है और उन पर पैसा भी खर्च करती है। निर्धन वर्ग मेडिकल इंश्योंरेंस का पैसा नहीं दे पाता है तो सरकार उस का प्रीमियम भरे। उन का कहना था कि एचआईवी एड्स पर इतना ज्यादा पैसा खर्च किया जा रहा है जिस की जरूरत नहीं है। एचआईवी एड्स के स्थान पर इस पैसे को सरकार स्वास्थ्य की उन चीजों पर खर्च करे जहां इस की जरूरत है। विशेषकर इस पैसे को गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से न देकर सरकार मेडिकल गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से दे। अत: आगामी बजट में एचआईवी एड्स पर बजट को कम किया जाना चाहिए। मूलचंद अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ श्रीमती इंदु खत्री का कहना है कि गांवों में प्रसूति के समय महिलाओं की मृत्यु दर बढ़ रही है और इस पर नियंत्रण पाने के लिए जरूरी है कि गांवों में डाक्टरों को जाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाए। इसलिए सरकार को चाहिए कि अपने बजट में जो डाक्टर गांवों में जाकर प्रैक्िटस करना चाहते हैं वहां उन की आय को आयकर से मुक्त किया जाए।

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  • Web Title: मेडिक्लेम में आेपीडी सेवाएं भी कवर हों