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देश के 73 फीसदी किसान महाजनों पर निर्भर

ेंद्र सरकार आगामी बजट में देश के किसानों के कर्ज माफ करने की तैयारी में है। लेकिन इसके जरियेउसके राजनीतिक फसल काटने के मकसद की कामयाबी पर सवालिया निशान लग सकता है। वजह साफ है। सरकार के इस कदम से देश के 73 फीसदी किसानों को कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि वह संगठित क्षेत्र से कर्ज लेते ही नहीं हैं। केवल 27 फीसदी किसान ही संगठित क्षेत्र की वित्तीय संस्थाओं से कर्ज लेते हैं। यह बात सामने आई है प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष डा. सी. रंगराजन की अध्यक्षता में वित्तीय समावेश पर गठित समिति की रिपोर्ट से।ड्ढr रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के केवल 27 फीसदी किसान ही संगठित क्षेत्र से कर्ज लेते हैं। किसानों सहित ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश आबादी की संगठित क्षेत्र की वित्तीय सुविधाओं तक पहुंच नहीं है। इस समस्या के हल के लिए समिति ने राष्ट्रीय ग्रामीण वित्तीय समावेश योजना (एनआरएफआईपी) बनाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही पांच-पांच अरब रुपये की राशि से वित्तीय समावेश प्रोत्साहन एवं विकास कोष (एफआईपीएंडडीएफ) और वित्तीय समावेश प्रौद्योगिकी कोष (एफआईटीएफ) स्थापित करने की सिफारिश की है। इनके लिए भारत सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड बराबरी की हिस्सेदारी में पैसा दें। वित्त मंत्रालय द्वारा मंगलवार को यहां जारी समिति की सिफारिशों के साथ कहा गया है कि उक्त दो कोष गठित करने की समिति की सिफारिश को सरकार ने स्वीकार कर लिया है। दोनों कोष में केंद्र सरकार का योगदान 60 फीसदी और बकाया 40 फीसदी में रिजर्व बैंक और नाबार्ड की बराबरी की हिस्सेदारी होगी। समिति ने एनएसएसएओ के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि देश के 8.रोड़ किसान परिवारों में से 51.4 फीसदी को संगठित या असंगठित किसी भी क्षेत्र से कर्ज की सुविधा नहीं मिल रही है। इनकी कुल संख्या 4.5रोड़ है। बैंकों की शाखाओं के विशाल नेटवर्क का इन लोगनों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। केवल 27 फीसदी किसान ही संगठित क्षेत्र के बैंको से कर्ज लेते हैं जबकि एक तिहाई किसान असंगठित क्षेत्र के कर्जदार हैं। पूर्वोत्तर मेंीसदी, पूर्वी क्षेत्र में 81.26 फीसदी और मध्य क्षेत्र में 77.5ीसदी किसान आबादी की संगठित क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों तक पहुंच नहीं है। सेीसदी तक की किसान आबादी इन सुविधाओं के वंचित है। समिति ने एनआरएफआईपी के तहत सभी वाणियिक एवं ग्रामीण बैंकों के लिए किसानों खोलने की एक निश्चित सीमा तय की गई है। इसके तहत पांच साल के भीतर उन 50 फीसदी लोगों का वित्तीय समावेश का लक्ष्य रखा है जो इससे बाहर हैं।

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