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चमड़ा क्षेत्र के लिए भी बनेगा डिजाइन सेंटर

राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलाजी संस्थान (निफ्ट) तथा राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान की तर्ज पर चमड़ा क्षेत्र के लिए भी एक डिजायन सेंटर खोले जाने की योजना है। सरकार सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की साझीदारी (पीपीपी) की तर्ज पर खुलने वाले इस संस्थान का समर्थन करेगी। सूत्रों ने बताया कि चमड़ा निर्यात परिषद (सीएलई) जल्द ही इस डिजायन सेंटर का प्रस्ताव सरकार के सामने पेश करने वाली है। उल्लेखनीय है कि रुपये की मजबूती ने सभी निर्यात क्षेत्रों को त्रस्त कर रखा है पर खासकर जो क्षेत्र रोजगारोन्मुखी हैं तथा छोटे और मझोले आकार के हैं, उनपर इसकी मार कुछ अधिक ही दिख रही है। ऐसे ही क्षेत्रों में देश का चमड़ा क्षेत्र भी है जिनमें 0 प्रतिशत से भी अधिक छोटे और मझोले आकार के हैं। रुपये की मजबूती के कारण इस क्षेत्र के निर्यात में चालू वित्त वर्ष (2007-08) में 25 प्रतिशत तक की गिरावट आने की आशंका है। चमड़ा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा रुपये की मजबूती थामने के लिए उठाए गए कदमों से इस क्षेत्र को फौरी राहत तो मिली है लेकिन इससे निर्यात में आने वाली कमी पर अधिक फर्क नहीं पड़ा है। सूत्रों ने बताया कि लगभग प्रतिशत चमड़ा निर्यातकों का टर्नओवर पचास लाख डालर से कम है तथा उनमें से अधिकांश छोटे एवं मझोले क्षेत्र (एसएमई) के हैं। निर्यात के लिए तो यह क्षेत्र अहम है ही, साथ ही यह एक महत्वपूर्ण रोजगार प्रदात्ता क्षेत्र भी है। जानकारों के अनुसार, इस क्षेत्र में पचीस लाख से भी अधिक लोग कार्यरत हैं जिनकी नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। इसके अतिरिक्त, रुपये की मजबूती के कारण भारतीय निर्यातक इस क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी पिछड़ने लगे हैं। सीएलई के सूत्रों के अनुसार, डालर की मजबूती के कारण वित्त वर्ष 2008 में चमड़ा निर्यात में 20 से 25 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है।

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