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‘विकेट बचाकर रखना जरूरी था’

चार विकेट जल्दी-जल्दी गंवाने के बाद भारत की रणनीति श्रीलंका के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज के मैच में 40 आेवर तक रक्षात्मक ढंग से खेलने के बाद अंतिम दस आेवरों में धमाकेदार बल्लेबाजी करने की थी। बारिश में धुले इस मैच में शतकीय पारी खेलने वाले भारतीय खब्बू बल्लेबाज गौतम गंभीर ने मंगलवार को यह खुलासा किया। अपने एकदिवसीय करियर का तीसरा शतक ठोकने वाले गंभीर ने कहा ‘हमारी योजना 40 आेवर तक विकेट बचा कर रखने और फिर तेजी से रन बनाने की थी। हमे पता था कि अगर हम बड़ी साझेदारी करने में कामयाब रहे तो अंत में रन गति तेज कर सकेंगे।’ दिल्ली के खब्बू बल्लेबाज ने कहा ‘धोनी ने अच्छी बल्लेबाजी की और हमने तेजी से दौड़ने पर जोर दिया, क्योंकि यह एक बड़ा मैदान था। ऐसे बड़े मैदानों में हम अच्छी रनिंग से दो-दो, तीन-तीन रन बना सकते हैं। स्ट्राइक बदलते रहना महत्वपूर्ण रहता है। यहां के मैदान भारत की तरह छोटे और तेज आउटफील्ड वाले नहीं हैं।’ गंभीर ने रविवार को सीरीज के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3रन बनाए थे, जब खब्बू तेज गेंदबाज मिचेल जॉनसन ने उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट किया था तो वह अच्छे निक में दिख रहे थे। लेकिन गंभीर ने कहा कि उन्होंने इस तरह आउट होने से सीखा है। गंभीर ने कहा ‘मैंने पिछले मैच का वीडियो देखा और पाया कि मैं गेंद की लाइन में आकर नहीं खेल रहा था। मैंने नेट पर फील्डिंग कोच रोबिन सिंह के साथ मेहनत की और सीधे बल्ले से काफी खेला।’ गंभीर कंधे में तकलीफ के कारण ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में नहीं खेल पाए थे। लेकिन उन्होंने दिल्ली की रणजी ट्रॉफी जीत में रनों का अंबार लगाया था। गंभीर ने कहा ‘आपके नाम रनों का होना हमेशा ही अच्छा रहता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में स्थितियां एकदम अलग हैं।’ वह 1 फरवरी को खेले गए 20-20 के मैच से ठीक पहले टीम से जुड़े और उन्होंने माना कि यहां कि पिचों के हिसाब से खुद को ढालने में उन्हें वक्त लगा। उन्होंने कहा ‘मुझे ज्यादा अभ्यास का मौका नहीं मिला था और यहां के माहौल में खुद को ढालने के लिए मैंने लंबी पारियां खेलने का फैसला किया था। गाबा की पिच पर समान उछाल था और गेंद बल्ले पर अच्छे ढंग से आ रही थी।’

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