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बिजली दर निर्धारण में फिक्स चार्ज का पेंच

राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा पावर कार्पोरेशन की ओर से दाखिल बिजली दरों में संशोधन के प्रस्ताव पर अंतिम फैसले की प्रक्रिया के दौर में शहरी घरेलू व मीटर से बिजली जलाने वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं से फिक्स चार्ज वसूलने के औचित्य पर ही सवाल खड़ा हो गया है। दरों के मौजूदा ढाँचे को बेहद जटिल करार देते हुए इसे सरल और उपभोक्ताओं की समझ में आने वाला बनाने की भी अपेक्षा की गई है। आयोग द्वारा लखनऊ में 18 फरवरी को आयोजित सार्वजनिक सुनवाई में इन मुद्दों के जोर-शोर से उठने की संभावना है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग में दाखिल अपनी आपत्तियों व सुझावों में कहा है कि घरेलू व ग्रामीण बिजली की दरें सस्ती कम होनी चाहिए क्योंकि इस तबके के लिए यह अवश्यकता है और उन श्रेणियों की बिजली दरें थोड़ी बढ़ाई जाएँ जो बिजली का इस्तेमाल कारोबर के लिए कच्चे माल के रूप में करते हैं। श्री वर्मा ने कहा कि जब उपभोक्ताओें को आयोग द्वारा तय समयसारिणी के मुताबिक बिजली उपलब्ध नहीं कराई गई तो ऐसे में इनसे फिक्स चार्ज नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने बिजली मूल्य का निर्धारण भी सिर्फ दो स्लैबों के तहत-एक गरीब व आम उपभोक्ताओं और दूसरा सक्षम उपभोक्ताओं के आधार पर करने की माँग भी की है। श्री वर्मा ने कहा है कि पिछली बार के बिजली दर निर्धारण में गाँवों को कम से कम 14 घंटे समेत बाकी जनपदों व तहसीलों के लिए भी समयसारिणी बनाई गई थी। जबकि गाँवों को बमुश्किल 8-घंटे ही बिजली मिल रही है। चूँकि कम बिजली मिली इसलिए इसकी भरपाई के लिए इस बार ग्रामीण बिजली की दरों में भारी कमी की जानी चाहिए।

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  • Web Title: बिजली दर निर्धारण में फिक्स चार्ज का पेंच