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स्टैंडर्ड डिडक्शन की हो सकती है वापसी

मध्यवर्गीय नौकरीपेशा वर्ग को स्टैंडर्ड डिडक्शन की वापसी के जरिये वित्त मंत्री पी. चिदंबरम आय कर के मोर्चे पर राहत दे सकते हैं। स्टैंडर्ड डिडक्शन को हटाये जाने से मध्य वर्ग को कम और उच्च आय वर्ग को अधिक फायदे को इसका कारण माना जा रहा है। यही वजह है कि राजनीतिक दलों का दबाव स्टैंडर्ड डिडक्शन की वापसी के लिए बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुमार इस कदम के लिए कई राजनीतिक दलों और खासतौर से वाम दलों का सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। इन लोगों का तर्क है कि 2005-06 के बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन के प्रावधान को समाप्त करने का नुकसान नौकरीपेशा वर्ग को हुआ। जबकि करमुक्त आय सीमा में हुई बढ़ोतरी और कर स्लैब में बदलाव का फायदा सभी करदाताओं को हुआ, अकेले वेतनभोगियों को नहीं। वहीं व्यवसायी और पेशेवर लोग अपने पेशे से जुड़े व्यक्ितगत खर्च दिखाकर आय कर में अधिक बचत करने की स्थिति में हैं जबकि आम नौकरीपेशा व्यक्ित ऐसा नहीं कर सकता जिसके चलते इस मोर्चे पर गैर-बराबरी की स्थिति बन गई है। सामान्य नौकरीपेशा व्यक्ित को मौजूदा प्रतिस्पर्धी माहौल में स्वयं को कार्यकुशल बनाये रखने के लिए इसी तरह के खर्चो के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में एकमुश्त कर राहत मिल रही थी। लेकिन अब ऐसा कोई प्रावधान नहीं बचा है। विश्व के अधिकांश देशों में नौकरीपेशा वर्ग को इस तरह की राहत मिल रही है। स्टैंडर्ड डिडक्शन को हटाये जाने से पहले 75000 रुपये से 5 लाख रुपये तक की वेतन आय वाले लोगों के लिए 30,000 रुपये की एकमुश्त कटौती का प्रावधान था। 5 लाख रुपये से अधिक के वेतनभोगियों के लिए यह 20,000 रुपये थी। आय में से सीधे स्टैंडर्ड डिडक्शन की कटौती के बाद ही करयोग्य आय मानी जाती थी। वेतन आय में वेतन, एन्नुटी, पेंशन, ग्रेच्युटी, फीस, कमीशन, भत्ते, एडवांस वेतन और छुट्टियों का भुगतान शामिल था। हालांकि उसके बाद फ्रिंज बेनिफिट टैक्स आने के बाद तमाम भत्ते और दूसरे भुगतान कर दायरे में आ गये हैं। स्टैंडर्ड डिडक्शन खत्म करने के पीछे कर सुधारों पर गठित केलकर समिति की सिफारिशों को आधार बनाया गया था। इस समिति के मुताबिक कटौती की समाप्ति के प्रावधान से सरकार को 4000 करोड़ रुपये राजस्व की बचत होगी। असल में समिति ने स्वरोजगाररत लोगों और पेशवरों को नौकरीपेशा लोगों की बराबरी में लाकर ऐसा किया क्योंकि पहले दो वर्गो को स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा नहीं मिलता था। लेकिन करमुक्त आय सीमा और कर दरों में किये गये बदलाव का फायदा सभी को मिला और कटौती समाप्त करने का नुकसान नौकरीपेशा वर्ग को हुआ। साथ ही समिति ने रिपोर्ट में स्वीकार किया था कि उपरोक्त दोनों वर्ग के लोग कई तरह के गैरजरूरी खर्चो को पेशेवर खर्च दिखाकर कर बचाते हैं।ं

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