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एफडी आकर्षक बना सकते हैं एफएम

बैंकों में एफडी में पैसा जमा कराने पर मिलने वाले खराब ब्याज और फिर ऊपर से ब्याज से सालाना दस हजार रुपये तक कमाने पर दस फीसदी टीडीएस की मार झेलने वाले बैंक खातेदारों को एफएम कुछ सांस लेने का मौका अपने आगामी बजट प्रस्तावों में दे सकते है। एफडी पर एक साल में मात्र दस हजार रुपये तक का ब्याज कमाने पर दस प्रतिशत ही टीडीएस और साथ में 0.20 प्रतिशत तक शिक्षा अधिभार (एजुकेशन सेस) अदा करना होता है। इन सारी स्थितियों के चलते बैंक एफडी को लेकर उत्साह ठंडा पड़ता जा रहा है। सूत्रों का कहना है बैंक एफडी से अवाम को जोड़ने की जोरदार वकालत सरकारी बैंकों के अध्यक्षों ने तब की थी जब वे वित्त मंत्री से कुछ समय पहले मिले थे। उस बैठक में एक राय यह बनी थी कि एफडी पर खातेदार को अब दस हजार रुपये पर 10 प्रतिशत टीडीएस देना होता है। इसे कम से कम 15 हजार रुपये तो तुरंत प्रभाव से कर ही दिया जाना चाहिए। यानी हर साल एफडी पर 15 हजार रुपये तक ब्याज कमाने की हालत में ही खातेदार को टीडीएस देना पड़े। इस राय से वित्त मंत्री भी इत्तेफाक रख रहे थे। सूत्रों का कहना है कि शिक्षा उपकर तो किसी भी हालत में कम से कम आने वाले कुछ सालों तक तो खत्म नहीं हो सकता। ताजा स्थिति यह है कि हर 10 हजार रुपये ब्याज कमाने वाले को 0.20 प्रतिशत (एक हजार पर 20 रुपये) अलग से सरकारी खजाने में डालना होता है। एक खबर यह भी है कि वित्त मंत्री बुजुर्गो को अलग से टीडीएस में कुछ और छूट दिलवा सकते हैं। वे इस वर्ग को अधिक ब्याज देने का प्रस्ताव ला सकते हैं। बैंकिंग एक्सपर्ट मानते हैं कि वक्त का तकाजा है कि वित्त मंत्री फिर से बैंकों में लोगों को अपना पैसा रखने के लिए प्रेरित करें। शेयर बाजार और म्युचुअल फंडों से मिलने वाले बेहतर रिटर्न के बाद वैसे भी कम से कम नौजवान पीढ़ी तो अब बैंकों और उसमें भी सरकारी बैंकों से दूरी बनी रही हैं। अब बुजुर्ग और पेंशन लेने वाले ही सरकारी बैंकों में जाते हैं। अगर बात सेविंग एकाउंट की हो तो सरकारी बैंक मात्र साढ़े तीन प्रतिशत ही ब्याज देते हैं। एफडी की भी हालत खस्ता है। जाहिर है कि अब वित्त मंत्री के पास एफडी को अधिक आकर्षक बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।ं

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