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नेता बनने की होड़ में शिव सेना गैर शिवसेना का चरित्र उजागर

महाराष्ट्र में मराठी-गैरमराठी के मुद्दे को गरमाकर जिस तरह से उत्तर भारतीयों को निशाना बनाया जा रहा है उसमें शिवसेना और गैरशिवसेना का चरित्र भी उजागर हो रहा है। मराठियों के नेता बनने की होड़ में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे सड़क पर उतर आए हैं तो उत्तर भारतीयों के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए समाजवादी पार्टी भी मैदान में डटी है। असलियत यह है कि इन दोनों पार्टियों का जनाधार नहीं है। लेकिन राज ठाकरे के आगे सत्तारूढ पार्टी का जो रवैया है उससे खासकर कांग्रेस का पुराना चेहरा भी सामने आ रहा है। बाल ठाकरे ने अपनी पार्टी शिवसेना की स्थापना के एक साल बाद ही भूमिपुत्रों के हक के लिए दक्षिण भारतीयों को मुंबई से भगाने की आवाज बुलंद की थी। इस समय उसी आवाज की नकल अब उनके भतीजे राज कर रहे हैं। कांग्रेस ने अपने सियासी खेल में शिवसेना के जरिए रोड़ा बने कम्युनिस्टों को साफ करवा दिया था और दूरदृष्टि का असर दिखाते हुए कांग्रेस ने शिवसेना को भी सत्ता से दूर ही रखा था। लेकिन लंबी लड़ाई के बाद शिवसेना को वर्ष 1में सत्ता सुख मिल गया। इसके बाद उसे सत्ता के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस बीच शिवसेना के कई टुकड़े हुए और उसी की पेट से मनसे भी निकली है। शिवसेना ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए मुंबई में तेजी से बढ़ रहे उत्तर भारतीयों से प्रेम करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मुंबईकर का भी नारा दिया था। अब राजनीति के मैदान में उद्धव को चचेरे भाई राज से टक्कर मिल रही है और दोनों मराठी कार्ड के सहारे ही महाराष्ट्र में सत्ता हासिल करने की होड़ में है। हालांकि उद्धव ने हिन्दुत्व का मुद्दा छोड़ा नहीं है। इधर कांग्रेस को जिस तरह से अपनी सहयोगी पार्टी राकांपा से हमेशा दुराव का डर बना रहता है उससे परेशान कांग्रेस के सामने इस समय पुराना खेल ही खेलने का रास्ता दिख रहा है। इसी खेल के तहत राज को प्रशासन का नैतिक समर्थन मिला हुआ है और पुलिस उनके साथ उसी तरह से पेश आ रही है जिस तरह से कभी वर्ष 1े दंगों के दौरान पुलिस शिवसैनिक बन गए थे। आपराधिक मामला दर्ज होने के बावजूद राज अपनी पत्नी के साथ मंगलवार की रात मुंबई पुलिस आयुक्त डीएन जाधव की बेटी की शादी के स्वागत समारोह में शामिल होते हैं और राज साहब की आवभगत में पूरा पुलिस दल जुटा रहता है। शिवाजी पार्क के पास ही उनके घर कृष्णकुंज को भी पुलिस घेरे में सुरक्षित रखा जा रहा है और उत्तर भारतीयों की पिटाई के समय पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है।ड्ढr

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