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कब तक उधार में निशाना लगाएंगे शूटर!

समरेश जंग इन दिनों खाली हैं। ये वे निशानेबाज हैं जो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं। कर्णी सिंह शूटिंग रेंज को नए सिरे तैयार किया जा रहा है इसलिए वे प्रैक्िटस नहीं कर सकते। लेकिन निगाहें लगी हैं अप्रैल में निशानेबाजी विश्व कप और अगस्त में ओलंपिक पर। दोनों ही बीजिंग में होने है। जिस तरह से इनकी तैयारियां चल रही है इससे ज्यादा उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। समरेश खुद इस बात को मानते हैं। कहते हैं, मैंने अपना ट्रेनिंग प्रोग्राम लिख कर दे दिया है लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। वैसे भी सरकारी फैसले अंतिम समय में ही होते हैं। एम्यूनिशन की कमी की ओर भी समरेश इशारा करते हैं। उन्होंने कहा, एक निशानेबाज को साल में 15 हजार कारतूस ही आयात करने का परमिट मिला हुआ है। इतना ऑर्डर कम्पनियां लेती नहीं है। फिर हम भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) से ही कारतूस मिलने का इंतजार करते हैं। कभी-कभी तो इंतजार इतना लम्बा हो जाता है कि ट्रेनिंग प्रोग्राम का समय ही निकल जाता है। निशानेबाजों से यह कहा जाता है कि कारतूस का इंतजाम वे खुद कर लें पैसा उन्हें बाद में दे दिया जाएगा। कब तक, आखिर कब तक निशानेबाज उधार में निशाना लगाते रहेंगे। कभी-कभी तो निशानेबाजों का उधार एक-एक करोड़ रुपए तक पहुंच जाता है। यह उस खेल की स्थिति है जिसमें भारत ओलंपिक मैडल की कुछ उम्मीद कर सकता है। भारत के निशानेबाज ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं। ओलंपिक कोटा हासिल कर चुके निशानेबाजों के ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए सरकार से ग्रांट मिलनी थी। उसका फैसला भी अभी तक नहीं हुआ है। ओलंपिक रजत विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ भी इस बारे में अपना एतराज जता चुके हैं। खेल मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि हमने साई को इस बारे में सारे अधिकार दे दिए हैं। जयपुर में होने वाली एशियाई क्ले शूटिंग चैंपियनशिप के लिए मंगलवार से दिल्ली में ट्रेनिंग कैम्प शुरू हुआ। पहला दिन था इसलिए बहुत कम निशानेबाज पहुंचे। वहां पहुंचने पर पता चला की एम्यूनिशन की भारी कमी है। एनआरएआई ने भी अब तो हाथ खड़े कर दिए हैं। उसके पास भी कोटा लगभग खत्म हो चुका है।

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