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बिहार में रेलवे की रफ्तार धीमी

तीन रेलमंत्रियों नीतीश कुमार, रामविलास पासवान व लालू प्रसाद के कार्यकाल में रेलवे के क्षेत्र में बहुत कुछ मिलने के बावजूद बिहार रेलवे लाइन, स्टेशन व ट्रेनों के मामले में अन्य राज्यों से काफी पिछड़ा हुआ है। देश में रेलवे का विकास भले ही काफी तेजी से हो रहा हो लेकिन बिहार में इसकी रफ्तार आज भी धीमी ही है। देश के अन्य राज्यों से तुलना की बात तो दूर यह अब तक बुनियादी जरूरतोंके मापदंड पर भी खरा नहीं उतर रहा। कारण सीधा सा है, रेलवे के मामले में बिहार दशकों से उपेक्षित रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भारतीय रेलवे को राजस्व का दस फीसदी से अधिक देने वाले इस राज्य में रेलवे के विकास पर पर महज दो से तीन फीसदी राशि ही खर्च की गई। पिछले वर्षो में इस कमी को दूर कर विकास राशि में भारी इजाफा हुआ और बिहार में रेलवे का विकास सही मायने में पटरी पर आ पाया। हालांकि अभी भी बिहार में कई चीजें ऐसी हैं जिनकी सख्त जरूरत है और बिहारवासी इसके लिए रेलवे की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।ड्ढr ड्ढr इस समय राज्य के कई हिस्से में छोटी लाइन ही है, जिससे वहां की रफ्तार थम सी गई है। यही नहीं राज्य से कई नई ट्रेनों की जरूरत शिद्दत से महसूस की जा रही है। जयनगर-दरभंगा और पूर्णिया दो ऐसे बड़े क्षेत्र हैं, जहां से राजधानी पटना और पटना होकर नई दिल्ली का कोई संपर्क नहीं है। पटना से गुवाहाटी के लिए एक ट्रेन की आवश्यकता आज भी बरकरार है। इसके अलावा पटना से मुम्बई के लिए मांग के अनुरूप काफी कम ट्रेनें हैं। सही मायने में सिर्फ दो ट्रेन ही पटना और मुम्बई के बीच चल रही है। रोजगार और चिकित्सा की दृष्टि से पटना-मुम्बई के बीच अभी और दो ट्रेनों की बेहद जरूरत है। इसी तरह पटना से रांची के बीच भी अच्छी ट्रेन की जरूरत महसूस की जा रही है। पटना-मुम्बई और पटना-रांची के बीच गरीब रथ चलाए जाने से यह कमी दूर हो सकती है।ड्ढr ड्ढr दरभंगा से पटना के बीच साधारण गाड़ियां ही हैं। इनके बीच कोई एक्सप्रेस या मेल गाड़ी चलाए जाने की जरूरत है। जयनगर-दरभंगा-पटना के बीच ट्रेन चलाए जाने से मिथिलांचलवासियों की बड़ी समस्या हल हो सकती है। यही नहीं दरभंगा से पटना होकर दिल्ली के लिए भी ट्रेन चलाई जा सकती है। कटिहार-पूर्णिया-बनमनखी-मधेपुरा-सहरसा के बीच छोटी लाइन के कारण यह क्षेत्र रेलवे के मानचित्र पर काफी पिछड़ा हुआ है। पूर्णिया और मधेपुरा के लोग राजधानी पटना और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से आज भी कटे हुए हैं। आमान परिवर्तन के बाद पूर्णिया से पटना और दिल्ली के लिए ट्रेन चलाकर इस कमी को दूर किया जा सकता है। सहरसा तक चलने वाले गरीब रथ का विस्तार भी किया जा सकता है। आमान परिवर्तन के बाद जोगबनी-पटना और जयनगर-सहरसा के बीच ट्रेन की जरूरत महसूस की जा रही है।ड्ढr ड्ढr पटना से लखनऊ के बीच गरीब रथ जैसी ट्रेन की कमी खलती है। इसी तरह पटना से त्रिवेन्द्रम और पटना से गोवा के बीच भी ट्रेन की मांग उठ चुकी है। पटना-पुणे को गोवा तक विस्तारित किया जा सकता है। पटना-धनबाद के बीच यात्रियों की भारी फजीहत है। ऐसे में इनके बीच एक ट्रेन की जरूरत है। इसी तरह पटना-गया के बीच शाम सात बजे के बाद दो सवारी ट्रेनों की कम से कम जरूरत महसूस की जाती है। इस रेलखंड में रात में चलने वाली एक्सपरेस गाड़ियों के यात्रियों को स्थानीय पैसेन्जरों से काफी परेशानी होती है। इसी प्रकार झाझा से पटना के बीच शटल जैसी ट्रेनों की जरूरत सैकड़ों व्यापारियों व दैनिक यात्रियों द्वारा शिद्दत से महसूस की जा रही है। पुरी-पटना व हिमगिरी की आवृत्ति बढ़ाने की मांग भी वर्षो से लंबित है। हावड़ा से मुम्बई के बीच चलने वाली जनता एक्सप्रेस भी वर्षो से बंद है।ं

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