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दोहरा मानदंड अपना रहा है केन्द्र : नीतीश

सीआईआई अध्यक्ष और शीर्ष उद्योगपति सुनील भारती मित्तल के सामने बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजद की पिछली सरकार से लेकर केन्द्र की यूपीए सरकार और सड़क निर्माण कर रही केन्द्रीय एजेंसियों पर भी निशाना साधा। साथ ही बिहार में आने वाले निवेशकों से दिल्ली में अपनी हैसियत का भी इस्तेमाल करने की अपील की।ड्ढr ड्ढr मुख्यमंत्री ने कहा कि हम विपक्षी नेता के रूप में हमेशा से यही कहते थे कि बिहार में खराब सरकार है। लेकिन यह तो सच पर पर्दा डालने जैसा प्रयास था। दरअसल तब यहां सरकार थी ही नहीं। केन्द्र की वर्तमान सरकार दोहरा मानदंड अपना रही है। प्रधानमंत्री हमें पेट्रोल में 5 प्रतिशत इथेनॉल के उपयोग की सलाह देते हैं और दूसरी ओर केन्द्र इथेनॉल बनाने नहीं देता। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपको हम अपना दुखड़ा इसलिए सुना रहे हैं, क्योंकि आप सभी जगहों पर जाते हैं। हमारी समस्याओं पर बखूबी चर्चा कर सकते हैं। इस पर श्री मित्तल का जवाब था, आप तो खुद ही प्रेरणादायी नेता हैं। फिर भी आप समझते हैं कि हमारी आवाज दिल्ली में सुनी जायेगी तो हम जरूर कहेंगे पर हमारी आवाज वहां कितनी बुलंद है, यह नहीं कह सकते।ड्ढr ड्ढr नवम्बर, 05 में बिहार की सत्ता की बागडोर संभालते समय के हालात का हवाला देकर श्री कुमार ने कहा कि तब यहां अजीब स्थिति थी। अस्पतालों में डॉक्टर नहीं। शिक्षकों-प्रोफेसरों को समय पर वेतन नहीं। इंजीनियर भी नहीं और बीडीओ-सीओ भी अपर्याप्त। छब्बीस माह के शासन में हमने कानून का राज कायम किया है। लोगों के मन से डर निकला है। यह तो आप (श्री मित्तल) भी मानते हैं। इसके लिए हम आपको धन्यवाद देते हैं। श्री कुमार ने कहा कि 2005-06 में प्रति व्यक्ित औसत आय 6700 रुपये थी जिसे 2010 तक 35000 रुपये करने का लक्ष्य है। इस दिशा में सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं। आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं। अगर आप सुबह में बॉटेनिकल गार्डेन जाइए तो वहां हरेक ब्रांड की कारें खड़ी दिखेंगी। सिर्फ धनतेरस के दिन 1540 कारें और 2500 मोटर साइकिलों की बिक्री हुई।ड्ढr ड्ढr श्री कुमार ने कहा कि दिल्ली में बैठे लोग बिहार के लिए काम करने का दावा करते हैं पर उनका कुछ भी काम दिख नहीं रहा। गन्ना अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव दस माह से केन्द्र के पास विचाराधीन है। सड़क बना रहीं केन्द्रीय एजेंसियों का काम संतोषजनक नहीं है। हम सभी दलों के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए सवा साल से समय मांग रहे हैं लेकिन अबतक इस पर ध्यान नहीं दिया गया। मतलब साफ है कि बिहार के सवाल पर उनके लिए (प्रधानमंत्री) ऐसा कर पाना संभव नहीं है। ऊर्जा के क्षेत्र में कई निवेशक यहां आना चाहते हैं। बिहार के पास अपना कोयला खान तो है नहीं। इसलिए हम चाहते हैं कि निवेशक दिल्ली से कोल लिंकेज हासिल करने के लिए प्रयास करें। राज्य सरकार उन्हें पूरी सहायता देगी।

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