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जल, जंगल व जमीन का जोश

उत्तराखंड के स्वयंसेवी व सामाजिक संगठनों ने एकजुटता का परिचय देते हुए वर्ष 2008 को उत्तराखंड नदी बचाआे वर्ष घोषित किया है उत्तराखंड में 15 नदियों की घाटियों में अनेक ग्रामीणों ने 1 से 15 जनवरी तक पदयात्रा की व रामनगर के सम्मेलन में नदी संबंधी पर्यावरणीय समस्याआें पर राज्य का ध्यान आकृष्ट कराया, लोक जलनीति की घोषणा की मांग के साथ जल, जंगल, जमीन पर ग्रामीणों का अधिकार, सूखती नदियों के पुनर्जीवन हेतु कार्यक्रम, बड़ी व मध्यम परियोजनाआें का निर्माण बंद करने, वृक्ष लगाने संबंधित प्रस्ताव भी इसमें शामिल रहे, पानी पर जनता का जोश व होश काबिले तारीफ था।ड्ढr पूरन चन्द्र पांण्डे, रामनगर, नैनीताल, उत्तराखंड सुख छीना सूचना पट्ट का भी सूचना पट्ट लोगों को सूचना देने के लिए लगाए जाते हैं। लेकिन कुछ स्वार्थी लोगों ने आम जनता का यह सुख भी छीन लिया, उन सूचना पट्टों पर अपने विज्ञापन, पैम्फलेट्स आदि चिपका देते हैं, जिससे मुख्य सूचना पढ़ी नहीं जा सकती। मैं उन स्वार्थी लोगों को सुझाव देना चाहूंगी कि अपने स्वार्थ के लिए अन्य लोगों को परेशान न करें। कहीं-कहीं स्पेशल (विशेष रूप) से लिखा होता है कि यहां विज्ञापन, पोस्टर, पैम्फलेट आदि न चिपकाएं पर जिस कार्य के लिए मना किया जाता है, उसे ही लोग जानबूझकर करते हैं।ड्ढr अनुराधा, दिल्ली किसी हादसे का इंतजार क्यों? एक बात समझ से परे हे कि नगर पालिका निगम और छत्तीसगढ़ प्रशासन जनहित से जुड़ी कोई कार्यवाही करने के लिए किसी हादसे का इंतजार क्यों करता है? लोहार चौक पर और सरस्वती स्कूल गली के अवैध कब्जों और नाली की अव्यवस्था ने नागरिकों का आवागमन इतना दूभर कर दिया है कि अब गली में एक रिक्शे तक का प्रवेश संभव नहीं है। विगत तीन सालों से हम वार्ड के नागरिक पार्षद से लेकर मुख्यमंत्री तक निवेदन करते आ रहे हैं। 27-01-2008 को पर्यटन मंत्री ब्रजमोहन अग्रवाल से मुलाकात करने पर उन्होंने कहा कब्जे पुराने हैं, तोड़ना संभव नहीं है। हमारे इस निवेदन पर कि गलत निर्माण को तोड़ने में नए पुराने का सवाल क्यों? फिर उनका कहना था कि यह चुनाव वर्ष है, चुनाव के बाद देखेंगे। निकम्मेपन की यह पराकाष्ठा भगवान न करे किसी हादसे का कारण बन जाए।ड्ढr विजय लोढ़ा, लोहार चौक, रायपुर, छत्तीसगढ़ भू-माफियाओं की चांदी ‘भाजपाई सपूत ने बिकवाया बॉर्डर’ समाचार पढ़ा। महाभारत में भीष्म पितामह ने कहा है कि देश की सीमाएं माता के आंचल के समान होती हैं। इसकी रक्षा करना प्रत्येक पुत्र का कत्तर्व्य है। आश्चर्य है कि यह काम उसी पार्टी के जुड़े व्यक्ित ने कथित रूप से करवाया है जो राष्ट्रवाद का नारा गला फाड़ फाड़कर लगाती है। वैसे पिछले 4-5 वषरे में भू-माफियाआें की चांदी हो गई है। गरीबों की जमीनें कौड़ियों के भाव खरीदकर भू-माफिया करोड़ों रुपए कमा लेते हैं।ड्ढr युधिष्ठिर लाल कक्कड़, लक्ष्मी गार्डन, गुड़गांव संस्थान चाहें तो सुधर जाएं बच्चे पाश्चात्य दार्शनिक फ्रायड ने अवदमन की व्याख्या करते हुए उसके व्यक्ितत्व पर प्रभावों का उल्लेख किया था, परंतु आधुनिकता एवं भौतिकताजन्य आपाधापी ने जिस अवदमन की सृष्टि की है, उसकी व्याप्ति कहीं अधिक है। गुड़गांव के एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान के दो छात्रों द्वारा अपने सहपाठी की हत्या को जिस सहजता से अंजाम दिया गया, वह इसका प्रमाण है। यद्यपि इसकी शुरुआत आर्थिक भूख से क्षुधित परिवारों की भौतिकवादी सोच, बच्चों की उपेक्षा से युक्त बालपन से उत्पन्न विलासी किशोर मन के रूप में होती है और इसे पुष्ट करते हैं आधुनिक संचार साधन और कम्प्यूटर गेम्स जैसे माध्यम। संस्थानों के स्तर पर इन्हें दुरुस्त करना असंभव नहीं। आवश्यकता है मात्र दृढ़ इच्छा शक्ित की।ड्ढr राजीव रंजन, दिल्लीं

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