अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बजट पर वाम दलों की कड़ी नजर

यूपीए सरकार के पिछले चार बजटों को अमीरों व कॉरपोरेट घरानों को मदद पहुंचाने वाला करार देते हुए चारों वाम पार्टियों ने सरकार को दो टूक कहा है कि आगामी आम बजट में किसानों व आम आदमी को राहत पहुंचाने वाले क्षेत्रों में आबंटन बढ़ाना होगा। वाम दलों की यह भी मांग है कि कॉरपोरेट घरानों, बड़े उद्योगपतियों व सेज के नाम पर सरकार को टैक्स रियायतें देने की परिपाटी खत्म की जाए। वाम दलों ने इस बात को भी गंभीरता से लिया है कि पिछले दो वषरे से सरकार ने उन्हें बजट पूर्व चर्चा के लिए बुलाना भी जरूरी नहीं समझा । माकपा, भाकपा, फॉरवर्ड ब्लाक और आरएसपी ने यूपीए के साथ बजट पूर्व बैठक से पहले गुरुवार को यहां कहा कि यूपीए सरकार के कई वादे अभी अधृूरे पड़े हैं। बेरोजगारी व महंगाई से जनता को निजात नहीं मिल पाई है, कृषि संकट लाइलाज हो रहा है और लोगों को सस्ता गल्ला मुहैया कराने का वादा पूरा नहीं हो रहा। सरकार खाद्य सुरक्षा की खातिर सब्सिडी बढ़ाने से मुंह मोड़ रही है। माकपा महासचिव प्रकाश करात ने वाम दलों की बैठक के बाद मांग की कि देश के कई भागों में कर्ज में डूबकर आत्महत्या को मजबूर किसानों को बचाने के लिए केरल सरकार की तर्ज पर पूरे देश में संकटग्रस्त किसानों की ऋण माफी के लिए आयोग बनाया जाए। बैठक में भाकपा महासचिव ए.बी. बर्धन, फारवर्ड ब्लाक महासचिव देवब्रत बिस्वास,आरएसपी नेता अबनी राय शामिल थे। करात ने पेट्रोलियम पदाथरे के दाम बढ़ाने की कोशिशों का विरोध करते हुए दोहराया कि आम लोगों पर महंगाई का बोझ लादने की बजाय सरकार को चाहिए कि वह आयातित कच्चे तेल पर कर ढांचे का पुनर्निधारण करे। भाकपा महासचिव ए. बी. बर्धन ने भी कहा कि हम सरकार के समक्ष इस मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाएंगे कि आम आदमी के अस्तित्व से जुड़े क्षेत्रों में बजट प्रावधान बढ़ाए जाएं। चारों वाम दलों ने बजट प्राथमिकताआें पर सरकार को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि स्वास्थ्य व शिक्षा पर खर्च लक्ष्य से कम हुआ है। उनकी मांग है कि ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना का देश के सभी जिलों में विस्तार किया जाए। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के तहत असंगठित क्षेत्र के लिए बजट में पूरे संसाधन जुटाए जाएं।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बजट पर वाम दलों की कड़ी नजर