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हमारे अपने समय के अग्निमित्र

‘स्त्रियाँ चतुर होती हैं’, ‘पुरुष अविश्वसनीय होते हैं’-नारी और पुरुष के स्वभाव पर अपनी कई ऐसी टिप्पणियों, जो किसी काल में अप्रासंगिक नहीं लगते, के कारण महाकवि कालिदास का ‘मालविकाग्निमित्रम्’ सदियों बाद भी हमारे आसपास के चरित्रों की कथा लगती है। सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ के निर्देशन में भारतेन्दु नाटय़ अकादमी के प्रशिक्षु रंगकर्मियों ने गुरुवार को इसका मंचन किया। गन्ना किसान संस्थान प्रेक्षागृह में आयोजित अकादमी के राष्ट्रीय नाटय़ समारोह का आरम्भ कालिदास के इस नाटक से हुआ।ड्ढr राजा अग्निमित्र दो पत्नियों-धारिणी और इरावती के बावजूद मालविका को पाने के हथकण्डे अपनाता है जिससे नाटक में हास्य की स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। प्रहसन शैली, विदूषक और हास्य के प्रसंगों में स्वत: अग्निमित्र का व्यक्ितत्व भी किसी विदूषक जैसा हो जाता है, संभव है कालिदास की मूल रचना में यह चरित्र ऐसा न हो लेकिन ऐसा करते हुए निर्देशक ने अग्निमित्र को राजा के प्रभामण्डल से निकालकर आम आदमी बना दिया है और यही इस नाटक की ताकत है। दर्शक नाटक से तादात्म स्थापित करते हैं और सदियों पुराने नाटक में चरित्रों की आपसी ईष्र्या, हथकण्डे, टिप्पणियाँ, स्वभाव और संवाद हमारे आज के समय के लगते हैं।ड्ढr प्रशिक्षु रंगकर्मियों से निर्देशक ने अच्छा अभिनय कराया है। संगीत प्रधान में लय-ताल की समझ और नृत्य का अभ्यास नाटक को सशक्त बनाता है। यह मंचन मूल नाटक की तरह सुखान्त नहीं बनता बल्कि ऐसी स्थितियों में तीनों ही स्त्रियों की अपनी वेदना और इनके बीच अग्निमित्र की दुर्गति के प्रतीक के साथ समाप्त होता है। रवि नागर का संगीत और गायन प्रभावपूर्ण है। प्रमुख भूमिकाओं में भारतेन्दु कश्यप, गुंजन कुमार, कामिनी दुबे, हेमा सिंह, मनोज कुमार मिश्र, गणेश कुमार, शाश्वत दीप, राकेश कुमार, अजय कुमार यादव, सुनील उपाध्याय, सुनयना शुक्ला, राजकुमार बिष्ट, निर्मला, मोनिका, शाजली खान, सुगन्ध खोसला ने रहे। संस्कृति मंत्री नकुल दुबे ने समारोह का उद्घाटन किया। वरिष्ठ रंगकर्मी राज बिसारिया ने कलाकारों का सम्मान किया।

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  • Web Title: हमारे अपने समय के अग्निमित्र