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ज्ञानेन्द्र ने राजतंत्र की समाप्ति पर गहरी निराशा जताई

नेपाल के राजा ज्ञानेन्द्र ने संसद द्वारा देश में राजतंत्र समाप्त करने के निर्णय पर गहरी असंतुष्टि और निराशा व्यक्त की है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष दिसंबर में अंतरिम सरकार में शामिल सात बड़े दलों ने देश में राजतंत्र समाप्त करने पर मुहर लगा दी थी और राजा के अधिकारों को निलंबित कर दिया था। एक जापानी समाचार पत्र ‘योमूरी शिमबून’ ने श्री ज्ञानेन्द्र के हवाले से बताया कि सांसदों का यह निर्णय देश के लोगों का फैसला नहीं है। यह लोकतंत्र नहीं है। शिमबून के संवाददाता के साथ एक बातचीत में श्री ज्ञानेन्द्र ने संसद द्वारा देश में राजतंत्र समाप्त करने की पर निराशा व्यक्त की है। अखबार ने अपने आनलाइन संस्करण में कहा है कि श्री ज्ञानेन्द्र ने अपने राजमहल ‘रॉयल पैलेस’ में अनेक जापानी संवाददाताआें से बातचीत में कहा कि वह देश में 240 वषर्ों से चले आ रहे राजतंत्र की समाप्ति को मानने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राजतंत्र के भविष्य का फैसला करना देश की जनता के हाथ में है। वर्ष 2006 में देश में एक सप्ताह तक चले लोकतंत्र समर्थन आंदोलन के बाद नेपाल में राजा के हाथ से सभी अधिकार छीन लिए गए थे। इसके बाद से श्री ज्ञानेन्द्र यदा कदा ही सार्वजनिक जीवन में लोगों के सामने आते हैं। श्री ज्ञानेन्द्र ने माआेवादी नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ नेता कार्रवाई करने की कोशिश कर रहे थे, जो देश की संस्कृति, सामाजिक और पारंपरिक मूल्यों के खिलाफ था। गौरतलब है कि नेपाल में श्री प्रचंड के नेतृत्व वाले साम्यवादी दल देश में राजतंत्र को समाप्त करने की मुहिम में सबसे आगे रहा था। उन्होंने देश में कानून और व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए अंतरिम सरकार की काबलियत पर भी सवाल खड़े किए हैं। श्री ज्ञानेन्द्र ने एक स्थानीय संस्थान द्वारा किए गए सर्वे में 4प्रतिशत लोगों द्वारा देश के संविधान में किसी न किसी रूप में राजतंत्र रखने के पक्ष में हैं।

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