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बीमा क्षेत्र चाहता है नई एफडीआई लिमिट

महीना आम बजट का है। इंश्योरेंस सेक्टर को यकीन है कि वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम बीमा सेक्टर में प्राण फूंकने के लिए एफडीआई की सीमा को वर्तमान 26 प्रतिशत से कम से कम 40 प्रतिशत तो करेंगे ही। बीमा सेक्टर और विभिन्न उद्योग और वाणिज्य संगठन तो पुरजोर मांग कर रहे हैं कि इसे 4प्रतिशत तक कर दिया जाए। लेफ्ट के दबाव के चलते ही सरकार बीमा क्षेत्र में एफडीआई को और नहीं बढ़ा पा रही है। सूत्रों का कहना है कि इस बार वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम अपनी सरकार के वादे को तमाम विरोधों को दरकिनार करते हुए एफडीआई की सीमा को बढ़ाने का अपने बजट में प्रस्ताव ला सकते हैं। एसोचैम के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत ने हाल ही में एक भंेट में कहा कि भारत में आ चुकी बहुत सी विदेशी बीमा कंपनियां अपना कारोबार बढ़ाने के लिए पूंजी उसी हालत में ला पाएंगी अगर वित्त मंत्री एफ डीआई की सीमा को बढ़ा देते हैं। भारत के बीमा बाजार ने दुनिया की चोटी की बीमा कम्पनियों को अपनी तरफ आकर्षित किया है। यह 17 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है। फिलहाल जीवन बीमा केक्षेत्र में 13 और गैर-जीवन बीमा क्षेत्र में 8 निजी कम्पनियां आ चुकी हैं। इन निजी कम्पनियों ने विदेशी कम्पनियों से तालमेल करके भारत के बाजार में दस्तक दी है। प्रुडेनशियल,एलाएंज, स्टैंडर्ड, एआईजी, एविवा, मैक्स, सन लाइफ और आईएनजी भारत में आ गई हैं। इनके अलावा फ्रांस की बड़ी बीमा कम्पनी एक्सा, कोरिया की सैमसंग, इटली की जेनरली, बेल्जियम की फोर्टिस, हालैंड की एगॉन और जापान की सोमपो भी भारतीय बाजार में आने के लिए बेताब हैं। इन्हें भी इंतजार है कि सरकार बीमा क्षेत्र में एफडीआई में इजाफा कर दे ताकि ये अपने कारोबार को फैला सकें।

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