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अरुणाचल पर चीन ने फिर उठाया सवाल

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा बताने पर चीन ने आधिकारिक विरोध दर्ज किया है। बीजिंग स्थित भारतीय राजदूत अनुपमा राव को इस बारे में विरोध जताते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीमा के सवाल पर वार्ता का सिलसिला जारी है, अत: इस मसले पर मनमोहन सिंह का इस तरह बयान देना ठीक नहीं। चीनी विरोध पर तीक्ष्ण प्रतिक्रिया मंे विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि अरुणाचल भारत का अभिन्न अंग है और प्रधानमंत्री देश में कहीं भी आ-जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री अरुणाचल प्रदेश गये थे और वहां कहा था कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है, इस पर किसी को शंका नहीं होनी चाहिए। चीन भी अरसे से अरुणाचल प्रदेश के काफी बड़े भू-भाग को अपना करार देता रहा है। खासतौर से तवांग को लेकर उसने काफी कड़ा रुख अख्तियार किया हुआ है। हालांकि 1में हमले के बाद उसकी सेनाएं वहां से पीछे चली गई थीं। जानकार बताते हैं कि सीमा को लेकर चीन के परंपरागत दावे के रवैये की वजह से सीमा विवाद के समाधान में अपेक्षित तेजी नहीं आ पा रही। चीन नियंत्रण की वास्तविक रेखा की पहचान के काम में भी आनाकानी कर रहा है, नतीजा यह कि अरुणाचल में अक्सर ही सीमा पर अतिक्रमण की वारदातें होती रहती हैं। इस बीच भाजपा ने सरकार से कहा है कि वह पीएम के अरुणाचल संबंधी बयान पर चीन की टिप्पणी का कड़ा जबाव दे। भाजपा ने विगत में यह आलोचना भी की थी कि प्रधानमंत्री अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के दौरान तवांग क्यों नहीं गए।

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