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अब अक्षरधाम मंदिर बना राजधानी की पहचान

भी दिल्ली की पहचान लाल किला, इंडिया गेट और कुतुब मीनार से हुआ करती थी, लेकिन अब अक्षरधाम मंदिर की ख्याति भी सात समंदर न सही हिंद महासागर के पार तो पहुंच ही चुकी है। जो ऐसा न होता तो यहां भारतीय नौसेना की पहल पर 14 और 15 फरवरी को आयोजित होने वाले सुरक्षा चुनौतियों से जुड़े गंभीर सम्मेलन में भाग लेने आ रहे हिन्द महासागर के आसपास के देशों के करीब 30 नौसेनाध्यक्ष और उनकी पत्नियां इस मंदिर को देखने का इसरार नहीं करते। यूं तो बांग्लादेश समेत कुछ मुस्लिम देशों के नौसेनाध्यक्ष अजमेर शरीफ भी जाना चाहते हैं, लेकिन अक्षरधाम का आकर्षण भी कम नहीं है। यूं कहें कि अक्षरधाम के बिना दिल्ली की यात्रा अधूरी ही मानी जाने लगी है। सम्मेलन के दौरान जहां नौसेनाध्यक्ष सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के तरीकों पर विचार विमर्श करेंगे, वहां उनकी पत्नियों को शॉपिंग तथा सैर कराने की विशेष व्यवस्था की गई है। इस मंदिर और दिल्ली के कुछ अन्य दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए विशेष वोल्वो बस का इंतजाम किया गया है। सम्मेलन समाप्त होने के बाद प्रगति मैदान में रक्षा प्रदर्शनी शुरू हो जाएगी लिहाजा बहुत से नौसेनाध्यक्ष इसे देखने के लिए रुकेंगे। इस बीच फुर्सत के पलों में मेहमानों को आगरा में ताज महल दिखाने भी ले जाया जाएगा। सम्मेलन के दौरान ही मेहमानों को गोवा ले जाने के लिए नौसेना ने कम किराए वाली एक एयरलाइन का विमान भी किराए पर लिया है। ऐसा पैसा बचाने के लिए नहीं बल्कि सभी नौसेनाध्यक्षों को विमान में एक जैसी सीटें उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है। नौसेना एक ओर जहां इतने बड़े आयोजन से उत्साहित है, वहीं तमाम मेहमानों की सुरक्षा के लिए भी एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। नौसेनाध्यक्षों की पत्नियां को दिल्ली में शॉपिंग करवाने के लिए भी पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। कई आभूषण खरीदने को उतावली हैं, तो कई गारमेंट और अन्य सामान की शॉपिंग करेंगी। नौसेना की कोशिश है कि नौसेनाध्यक्षों के साथ-साथ उनकी पत्नियों की भी पूरी आवभगत हो। सम्मेलन में पाकिस्तान को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वहां के नौसेनाध्यक्ष नहीं आ रहे। इसी तरह अभी ईरान के नौसेनाध्यक्ष के आने का भी खुलासा नहीं किया गया है।

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