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दुर्लभ सफेद बाघ के जोड़े अब भोपाल वन विहार में

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का राष्ट्रीय उद्यान वन विहार सफेद बाघ के लिए तरस रहा था लेकिन अब इंतजार की घड़ियां खत्म होने जा रही हैं और यहां आने वाले दर्शक जल्द ही दुर्लभ सफेद बाघ का जोड़ा देख सकेंगे। दुनिया को सफेद बाघ की सौगात टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्यप्रदेश की रीवा रियासत के तत्कालीन महाराज मार्तण्ड सिंह ने 1में (बांधवगढ)जो अब राष्ट्रीय उद्यान है,के बागरी में एक सफेद बाघ शावक को लावारिस स्थिति में देखा और उसे अपने साथ ले आए। बाद में उन्होंने इस बाघ शावक को मोहन नाम दिया। वन विहार के संचालक एस एस राजपूत ने बताया कि केन्द्रीय प्राणिद्यान प्राधिकरण पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत भुवनेश्वर के नंदन कानन प्राणिउद्यान से सफेद बाघ के जोड़ा गत 22 अप्रैल को यहां लाया गया था। केन्द्रीय प्राणिउद्यान प्राधिकरण के नियमों के मुताबिक ऐसी स्थिति में नवागत वन्य प्राणी को कम से कम तीन सप्ताह तक विहार के अन्य जानवरों और दर्शकों से दूर रखना अनिवार्य है। इसी 18 मई से दर्शक यहां अठखेलियां करने वाले सफेद बाघ के जोड़े को देख सकेंगे। राजपूत ने बताया कि सफेद बाघ के जोड़े के बदले में वन विहार से एक बाघिन सारा और सियार के तीन जोडे नंदन कानन प्राणिउद्यान को दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि उड़ीसा से भोपाल के वन विहार आने वाले इस बाघ जोड़े के एंडो पेरामाइड स्टूल्स और ब्लड काउंट के नमूने लेकर उनकी जांच कराई गई है। इस प्रक्रिया से पता चलता है कि उन्हें कोई ऐसी संक्रामक बीमारी तो नहीं है जो दूसरे वन्यप्राणियों में भी फैल सकती है। राजपूत ने बताया कि वन विहार में सफेद बाघिन रिनी की मृत्यु 1वर्ष की आयु में कैंसर की वजह से सितंबर 2008 में हो गई थी। तब से यहां इस प्रजाति का कोई बाघ या बाघिन नहीं थी। सफेद बाघ की औसत आयु 13 से 14 वर्ष होती है जबकि पीली धारी वाले सामान्य बाघों की आयु 15 से 16 वर्ष होती है। वर्ष 1में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजरुन सिंह के विशेष प्रयासों से बडी झील के किनारे वाले चार हजार हेक्टयर में फैले पहाड़ी क्षेत्र में वन विहार की स्थापना की गई।

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  • Web Title: दुर्लभ सफेद बाघ के जोड़े अब भोपाल वन विहार में