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सिपाही ने हनुमान सेतु से गोमती में कूदकर दी जान

मड़ियाँव थाने में तैनात सिपाही सुरेश ने हनुमान सेतु से गोमती में कूदकर खुदकुशी कर ली। मल्लाहों की मदद से उसके शव को पानी से निकाला गया। वह गुरुवार को रात्रि ड्यूटी करने के बाद तड़के थाने से डेली रजिस्टर लेकर एसएसपी आवास के लिए निकला था। उसने यह कदम क्यों उठाया? इस सवाल का कोई ठोस जवाब नहीं मिल सका है। एसएसपी अखिल कुमार के मुताबिक उसने पारिवारिक मनमुटाव के कारण यह कदम उठाया है। हालाँकि पंचनामा में पुल की रेलिंग से अचानक सिपाही के नदी में गिरने का जिक्र किया गया है पर कोई भी अफसर मुँह खोलने को तैयार नहीं है।ड्ढr हसनगंज कोतवाली परिसर स्थित पुलिस क्वार्टर निवासी सुरेश दुबे (37) गुरुवार की शाम घर से निकला था। मड़ियाँव थाने पर सात माह से तैनात सुरेश सात जनवरी की रात सिपाही बृजपाल के साथ टीसी मोबाइल (मोटरसाइकिल) पर डय़ूटी पर था। देर रात हुई चेकिंग में दोनों गश्त पर मिले थे। पुलिस के मुताबिक शुक्रवार को तड़के दोनों थाने पहुँचे और मोबाइल खड़ी की। बृजपाल एक होम गार्ड के साथ क्षेत्र में चला गया। 5:15 बजे सुरेश डेली रजिस्टर लेकर एसएसपी आवास के लिए निकला था, जो हनुमान सेतु से गोमती में कूद गया। एक युवक ने 7:30 बजे महानगर कोतवाली पर एक व्यक्ित के कूदने की सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुँची। बाद में मल्लाहों व पीएसी के जवानों ने शव को पानी से बाहर निकाला। नेम प्लेट के आधार पर उसकी पहचान हुई। सुरेश के माथे पर टीका लगा था। अनुमान है कि वह हनुमान सेतु मंदिर गया था। उसकी जेब से 23 रुपए व चाभियाँ मिलीं। वहीं एसपी ट्रांसगोमती अशोक प्रसाद के मुताबिक एक मल्लाह ने डूब रहे सिपाही को बचाने के लिए अपना अंगौछा भी फेंका, जो उसने नहीं पकड़ा। थोड़ी ही देर बाद वह डूब गया। चार भाइयों में सबसे बड़ा सुरेश एक दिसंबर 1ो पुलिस में भर्ती हुआ था। इससे पहले वह एसपी ट्रांसगोमती कार्यालय, गोमतीनगर व हसनगंज कोतवाली में तैनात था। उसके पिता दीवान राधेश्याम कानपुर नगर पुलिस लाइन में स्टोर इंचार्ज हैं। वह सुलतानपुर के कुचमुच गाँव का रहने वाला था। परिवारीजनों ने सुरेश के किसी तरह के तनाव में होने की बात से इनकार किया है। उसे तो यकीन ही नहीं हुआड्ढr द्य ..शुक्रवार की सुबह सुरेश की पत्नी सुनीता, बेटी गरिमा (14) व बेटे गौरव (11) को स्कूल भेजने की तैयारी में जुटी थी। तभी एक मनहूस खबर आई जिसे सुनते ही सुनीता चीख पड़ी। कुछ देर के लिए तो उसे होश ही नहीं रहा। वह आनन-फानन में बच्चों व देवर महेश के साथ मच्यरुरी पहुँची। पति का शव देखकर तो फूट ही पड़ी। अब घर पर पड़ोसी महिलाएँ उसे समझाने में जुटी हैं। पर संवेदना का हर बोल उसे बेईमानी लग रहा है। सच तो यह है कि वह अपना सबकुछ गँवा चुकी है। हसनगंज कोतवाली के पास बने पुलिस क्वार्टरों में सन्नाटा है। सभी सुरेश के दरवाजे पर इकट्ठा हैं। कक्षा 10 की छात्रा गरिमा व कक्षा सात के छात्र गौरव को देखकर सभी यही कह रहे थे कि ..इन बच्चों के लिए भविष्य की चुनौती बहुत बड़ी है।ड्ढr मौत के पीछे कहीं विभागीय उत्पीड़न तो नहींड्ढr द्य ..कहीं सुरेश ने विभागीय उत्पीड़न से आजिज आकर तो खुदकुशी नहीं की! चर्चा है कि वह अपने तबादले को लेकर परेशान था। हालाँकि अधिकारियों ने इससे इनकार किया है। भले ही पुलिस अधिकारी सिपाही के विभागीय उत्पीड़न की बात को नकार दें, पर हालात इसी आेर इशारा कर रहे हैं। घटना के बाद महकमे का उदासीन रवैया भी कम चौंकाने वाला नहीं है। मसलन उसकी मौत के 18 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस अधिकारियों को यह नहीं पता था कि वह किस वाहन से डेली रजिस्टर लेकर थाने से निकला था। न ही यह पता लगाया जा सका कि वह एसएसपी आवास पहुँचा अथवा नहीं। विभागीय उत्पीड़न का सवाल आते ही अधिकारी चुप्पी साध गए। वहीं साथी पुलिसकर्मियों की मानें तो सुरेश बेहद सौम्य व मीठे स्वभाव का था। उनके लिए भी सुरेश की मौत का सदमा गहरा है। साथी पुलिसकर्मियों के चेहरे पर ड्यूटी की परेशानियों और तनाव को लेकर चिंता की लकीरें जरूर नजर आ रही थीं। दबी जुबान छुट्टी न मिलने व लगातार ड्यूटी की बात भी कही।

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