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बाबा आम्टे ने दुनिया को कहा अलविदा

प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. बाबा आम्टे का महाराष्ट्र के चदं्रपुर जिले में शुक्रवार रात निधन हो गया। वह वर्ष के थे। बाबा आम्टे ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। उन्होंने अपने आश्रम आनंदवन में अंतिम सांस ली। उनके परिवार में दो पुत्र हैं। बाबा आम्टे ने अपना जीवन समाज कल्याण और कुष्ठ रोगियों के लिए समर्पित कर दिया था। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने बाबा आम्टे के निधन पर शोक व्यक्त किया है। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अपने शोक संदेश में कहा है कि बाबा आम्टे ने अपना सारा जीवन वंचितों और समाज के पिछड़े वगर्ों की सेवा में लगा दिया। उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने कहा है कि वह गरीबों के मसीहा थे तथा उनके निधन से देश की अपूरणीय क्षति हुई है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें सच्चा गांधीवादी और गरीबों का मसीहा बताते हुए कहा है कि उन्होंने भेदभाव मिटाने और एकता बनाए रखने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उन्होंने कुष्ठ रोगियों की सच्चे मन से सेवा की और वे भारत के सच्चे सपूत थे। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि बाबा आम्टे का जीवन उन सभी लोगों के लिए प्रेरक बना रहेगा जो मानवता और समाज के लिए काम करना चाहते हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा कि वे कुष्ठ रोगियों की सेवा के लिए जाने जाएंगे और वे देश के सर्वाधिक सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता थे।

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